
इतिहास ने वो तवज्जो नहीं दी, जिसके कि वो हकदार थे। इन क्रांतिकारियों में एक नाम है वीरांगना रानी वेणुनाचियार का, जिनका जीवन रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और झलकारी बाई से कम रोचक नहीं है। अंग्रेजों को चुनौती देने वाली और पति की मृत्यु का बदला लेने वाली इसी वीरांगना के जीवन को एकरंग सोशियो कल्चरल सोसायटी ने नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया। रविवार को कला मनीषी नाट्य समारोह के अंतिम दिन रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप में नाटक रानी वेणुनाचियार (रणभूमि की नायिका) का मंचन किया गया। नाटक के जरिए इस वीरांगना के बलिदान और वीरता से दर्शकों को रुबरू होने का मौका मिला। तारिक दाद द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन विभा श्रीवास्तव ने किया।
अंग्रेजों से चंडी की तरह करती है युद्ध
नाटक में वेणुनाचियार द्वारा अंग्रेजों से युद्ध के दौरान पति की मौत के बाद उसका शीष हाथ में लेकर चंडी का रूप धारण कर अंग्रेजों से युद्ध करना। सैनिकों की संख्या कम होने पर अपनी हार को भांपते हुए टीपू सुल्तान की शरण में पहुंचना। फिर दो साल बाद टीपू सुल्तान व वेणुनाचियार द्वारा अंग्रेजों पर आक्रमण कर शिवगंगा को अंग्रेजों से मुक्ता कराने जैसे दृश्य पिरोए गए थे। अपने राज्य को प्राप्त करने के बाद वेणुनाचियार पति की समाधि पर बैठे-बैठे प्राण त्याग देती है।
Published on:
06 Mar 2023 04:39 pm

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