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कैमरों से लैस होंगे प्रदेश के थाने

सीटीवी में रहेगी डेढ़ साल की रिकॉर्डिंगपुलिस थानों पर रहेगी तीसरी नजर पुलिस से नाराजगी दूर करने की कोशिश  
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भोपाल

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Arun Tiwari

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Updated: 10 Jul 2021, 10:32 PM IST

CCTV Camera

CCTV Camera

भोपाल : पुलिस के प्रति बढ़ती लोगों की नाराजगी और कार्यवाही न होने की शिकायतें दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय नया प्रयोग करने जा रहा है। प्रदेश के सभी थानों और पुलिस चौकियों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस पर 80 करोड़ का बजट खर्च किया जा रहा है। सरकार ने पुलिस मुख्यालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस पर काम शुरु हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट भी सभी थानों और पुलिस अफसरों के दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दे चुकी है। इन सीसीटीवी कैमरे लगाने से पुलिस मुख्यालय की मैदानी पुलिस पर तीसरी नजर रहेगी। इन सीसीटीवी कैमरों में डेढ़ साल का बैकअप रहेगा।

सात महीने में 88 हजार शिकायतें :
पुलिस के खिलाफ आम लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस के एफआईआर न लिखने, ठीक से जांच न करने और आरोपियों की गिरफ्तारी में लेनदेन करने को लेकर लोग पुलिसिया रवैये की शिकायत करते हैं। इस साल पिछले सात महीने में पुलिस के खिलाफ 88 हजार से ज्यादा शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हो चुकी हैं। इन शिकायतों को दूर करने के लिए ही सरकार ने पीएचक्यू को ये नई व्यवस्था शुरु करने के निर्देश दिए हैं। आम लोगों के मानवाधिकारों का हनन न हो, इसके लिए थाना परिसर और आम लोगों की आवाजाही के स्थान कैमरों की जद में रहेंगे।

चार महीने में पूरा होगा काम :
प्रदेश के 1107 पुलिस थानों और 653 पुलिस चौकियों में थाना प्रभारी, सब इंस्पेक्टर के कमरे से लेकर थाने और चौकी के कमरों के भीतर और बाहर सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी। यह काम अगले चार माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस थानों में दस से बारह और पुलिस चौकी में चार से पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए जाना प्रस्तावित है। इन कैमरों में नाइट विजन और साउंड रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी रहेगी। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग का बैकअप डेढ़ साल का रहेगा। इससे पुलिस द्वारा की जाने वाली अभद्रता की शिकायत की जांच रिकॉर्डिंग के आधार पर की जा सकेगी।

हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी थानों और पुलिस चौकियों में कैमरे लग जाएं। इससे थाने में आने वाले सभी लोगों के मानवाधिकार की रक्षा होगी। डेढ़ साल का बैकअप होने से देरी से होने वाली शिकायतों की सत्यता भी परखी जा सकेगी।
- संजय झा, एडीजी, आईटी