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हेल्थ आईडी कार्ड बनाने में प्रदेश का 9वां स्थान, अब लोग हो रहे परेशान

मध्य प्रदेश में केंद्र की योजनाएं फेल....

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Health ID card

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत हेल्थ कार्ड बनाने के मामले में मध्यप्रदेश नौवें 9वें पर है। मरीजों को इलाज में आसानी एवं सहजता दिलाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई थी। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार पिछले 1 साल में इस योजना को ठीक ढंग से प्रदेश भर में लागू करा पाने में नाकाम रही।

पिछले 1 साल में प्रदेश में अब तक कुल 68 लाख लोग डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड बनवा चुके हैं ।लेकिन जब इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां उनकी आईडी से कोई भी जानकारी डिस्प्ले नहीं हो रही है। डॉक्टरों को मेडिकल हिस्ट्री बताने के लिए उन्हें पुरानी फाइलें ही लेकर जाना पड़ रहा है। दरअसल यह कार्ड उन्हीं स्वास्थ्य सुविधाओं और उन्हीं डॉक्टरों के पास एक्सेस होगा जिनका डिजिटल हेल्थ मिशन में रजिस्ट्रेशन हुआ है ।

केवल 28 डॉक्टर ही हो सके हैं रजिस्टर्ड

मध्यप्रदेश में अब तक 711 डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया है इसमें से सिर्फ 28 को ही रजिस्टर्ड किया गया है। वहीं आंध्रप्रदेश में डिजिटल हेल्थ मिशन में रजिस्टर किए गए डॉक्टरों की संख्या 7357, चंडीगढ़ 1698, और जम्मू कश्मीर में 1210 है। मध्यप्रदेश में अब तक 2382 स्वास्थ्य सुविधाओं को रजिस्टर किया गया है जबकि 4123 एप्लीकेशन पेंडिंग है। यूपी में 26824, आंध्र प्रदेश में 13371, पश्चिम बंगाल में 10231 और महाराष्ट्र में 9682 स्वास्थ्य सुविधाएं रजिस्टर हैं।

डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड बनाने का काम पहले नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के पास था ,अब इसे आयुष्मान भारत के अंतर्गत डिजिटल मिशन को सौंप दिया गया है। डिजिटल आईडी कार्ड बनाने के मामले में मध्यप्रदेश का देश में नौवां स्थान है, जबकि इस कार्ड को बनाने में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है जहां करीब 2 करोड़ 82 लाख लोगों लोगों का हेल्थ आईडी कार्ड बनाया जा चुका है। वहीं बिहार में 1 करोड़ 47 लाख, केरल में 1 करोड़ 28 लाख , यूपी में 1 करोड़ 27 लाख और पश्चिम बंगाल में 1 करोड़ 10 लाख कार्ड बन चुके हैं।

क्या है डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड

डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत बनाया जाने वाला एक हेल्थ हिस्ट्री कार्ड है। इस हेल्थ आईडी कार्ड में मरीज के पूरे हेल्थ रिकॉर्ड जैसे एक्स-रे रिपोर्ट दवाइयां डिस्चार्ज समरी सहित संबंधित जानकारियां अपलोड की जाती हैं इसका फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर डॉ उस व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन देख सकते हैं मरीज को किसी भी प्रकार की दस्तावेज फाइल डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत नहीं होगी।