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कानपुर की मिट्टी से बन रही मां दुर्गा की मूर्ति, बंगाल से बुलाए गए विशेष मूर्तिकार

कई कारीगर इसके लिए कानपुर से भी विशेष प्रकार की मिट्टी मंगवाते हैं.....

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भोपाल। कोविड के दो साल बाद एक बार फिर से अब शहर में त्योहारों की धूम है। गणेश चतुर्थी के पूजन में पूरा शहर भक्तिमय है। इसी के साथ नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहरवासियों में नवरात्र के लिए सबसे आकर्षक दुर्गा प्रतिमाओं की होड़ है। इसके लिए बंगाल से विशेष मूर्तिकार बुलाए गए हैं। यह पांच महीने पहले ही भोपाल आ गए। कारीगर 18-20 घंटे काम कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि प्रतिमाओं के निर्माण के लिए यह अपने साथ कोलकाता की मिट्टी भी लेकर आए हैं।

फिनिशिंग के लिए कानपुर की मिट्टी

मूर्तिकार दुर्गा मां की प्रतिमाएं बनाने के लिए मिट्टी बंगाल से ही लाते हैं। मूर्तिकारों के मुताबिक प्रतिमा में फिनिशिंग सिर्फ वहीं की मिट्टी से आती है। कई कारीगर इसके लिए कानपुर से भी विशेष प्रकार की मिट्टी मंगवाते हैं।

चिकनी और चिपचिपी होती है बंगाल की माटी

देवी की प्रतिमाएं बनाने में कई महीने का समय लगता है। पहले लकड़ी से ढांचा खड़ा किया जाता है। फिर इस पर घास-फूंस, सुतली और लोकल मिट्टी से लेप किया जाता है। बाद में बंगाल की विशेष मिट्टी से इसे फाइनल फिनिशिंग दी जाती है। बंगाल की मिट्टी चिकनी और चिपचिपी होती है। प्रतिमा पर इसका लेप चढ़ाने के सूखने के बाद भी इसमें दरार नहीं आती। मिट्टी सूखने के बाद इस पर कपड़ा चढ़ाया जाता है और वॉटर कलर से फिर इसे रंगते हैं। आखिरी के 8 दिनों में दिन-रात लगकर कारीगर मूर्ति को गहने से सजाते हैं।

कोलकाता के आभूषणों से ही श्रृंगार

शहरवासियों में माता पर सजे आकर्षक और महंगे आभूषणों का क्रेज बढ़ रहा है। कई लोग मूर्ति से ज्यादा आभूषणों पर खर्च करते हैं। एक शहरवासी ने 20 हजार की मूर्ति को 40 हजार के गहनों से सजाने का ऑर्डर दिया है। विशेष बात ये है कि माता को केवल कोलकाता से लाए गए आभूषण ही चढ़ाए जाते हैं।

5 करोड़ से ज्यादा मूर्तियों का कारोबार

शहर में कई जगह मूर्तियां बन रही हैं। इन मूर्तियों की कीमत 10 हजार से लेकर 2 लाख तक है। यहां आसपास के जिलों से भी लाखों के ऑडर आते हैं। ऐसे में राजधानी में करीब 5 करोड़ का मूर्तियों का कारोबार हर साल होता है।

सबसे ऊंची 15 फीट की मूर्ति

शहर की सबसे उंची दुर्गा की मूर्ति 15 फीट की बन रही है। मूर्तिकार राजू कुशवाहा ने बताया कि इस बार 35 मूर्तियां बनाने का टारगेट है। इसके लिए 17 मूर्तिकार बंगाल से आए हैं।

सालभर पहले बुकिंग

बंगाल से आए मूर्तिकार सोमू नंदी ने बताया कि कोई मद्रास की माता रानी बनवाते हैं तो कुछ वैष्णों देवी का दरबार बनवाते हैं। ऐसी ही कई अलग-अलग रूपों के एक-एक साल पहले इसके लिए ऑर्डर आने शुरू हो जाते हैं। ये पिछले 35 सालों से कलकत्ता से हर साल भोपाल की दुर्गा प्रतिमाएं बनाने आते हैं।

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