
हनुमान जी समुद्र पार कर लंका पहुंचे, जहां विभीषण से भेंट हुई। महाराज ने बताया कि हनुमान जी ने विभीषण से स्वयं जाकर भेंट की। सज्जन व्यक्ति से, अच्छे व्यक्ति से खुद जाकर मिलना पड़े तो मिलना चाहिए, क्योंकि साधु व्यक्ति, सज्जन व्यक्ति से भेंट करने से कारज में कोई हानि नहीं होती है। आगे की कथा में बताया कि जानकी मैया पीड़ा में डूबी हुई थीं, वह निराश हो रही थीं। लंका में बैठे-बैठे वहां पर हनुमान जी ने राम की कथा सुनाई तो उनको आशा की किरण दिखाई पड़ी। भगवान की कथा व्यक्ति के जीवन में आशा की नई रोशनी लेकर आती है। कोई भी व्यक्ति कितना भी हताश हो गया हो, निराश हो गया हो, संसार से कितना भी टूट गया हो पर वह भगवान की कथा में निरंतर लग जाए तो उसे आशा की एक ज्योति दिखाई देने लगेगी।
हनुमान जी द्वारा लंका का दहन करना, समुद्र पर पुल बांध कर वानर सेना के साथ राम जी का लंका पहुंचने की कथा सुनाई। जब राम ने रावण का उद्धार किया तो रावण ने कहा राम मैं आपसे नहीं हारता। मैं पहले वहां हार गया जहां आपका भाई आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में खड़ा है और मेरा भाई मेरे विरोध में। परिवार को जोड़ के रखना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। राम लौटकर अयोध्या आए। राज्याभिषेक कर उत्सव मनाया गया। महाराज ने बताया जैसा उत्सव त्रेता युग में राम के अयोध्या लौटने पर हुआ वैसा ही अयोध्या में फिर से 550 वर्ष बाद होने जा रहा है, जब राम जी 22 जनवरी को राम मंदिर में विराजमान होंगे।
महाराज ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट, भारत के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को धन्यवाद किया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। कथा में मुख्य यजमान सरिता सिंह (खुशबू) उदय प्रताप सिंह और सह यजमान उमा-मान सिंह सेंगर रहे। कथा सुनने विष्णु राने, राम मनोहर सिंह सेंगर, रामबाबू शर्मा, महेश मालवीय, रमन तिवारी, संजय सिवनानी, पार्षद बी शक्ति राव, सुरेंद्र धोटे, अभिषेक पाराशर, कृष्णा लिखितकर, ममता श्रीवास्तव, रेखा पटेल,सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Published on:
04 Jan 2024 09:55 pm
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