
भोपाल। कई बार लोगों के पुनर्जन्म समेत कई प्रकार के अश्चर्यचकित करने वाले मामले सामने आते रहते हैं। जिनकी सत्यता पर भी लोगों द्वारा प्रश्न उठाना आम बन जाता है। लेकिन मंगलवार को भोपाल के बैरागढ़ में एक ऐसी घटना घटी कि लोग चौंकने के साथ ही दहशत में भी आ गए।
जी हां, भोपाल के पास बैरागढ़ में मंगलवार को एक अजीबोगरीब घटना हुई, यहां डॉक्टरों ने जिस वृद्ध को मृत घोषित कर दिया था वो वृद्ध फिर जिंदा हो गया। जानकारी के अनुसार जब घर में इस वृद्ध के अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही थी तभी उनके शरीर में हलचल शुरू हो गई, फिलहाल उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मामला संतनगर का है। जानकारी के मुताबिक समाजसेवी मोटूमल वासवानी की तबीयत खराब थी। दिल का दौरा पड़ने से उन्हें चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उनकी तबीयत नाजुक ही बनी हुई थी। रात में सांस नहीं चलने पर मोटूमल वासवानी को वेंटिलेटर पर रखा गया था। बाद में अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार वाले उन्हें लेकर घर आ गए। वे सिंधी पंचायत के संस्थापक थे लिहाजा उनके निधन की खबर मिलते ही लोगों का उनके घर आने का सिलसिला शुरू हो गया।
इसके बाद परिजन दोपहर में 1 बजे निकलने वाली उनकी शवयात्रा की तैयारियां कर रहे थे कि तभी अचानक उनके शरीर में हलचल हुई। इस पर तुरंत परिवार वाले उन्हें लेकर फिर अस्पतला पहुंचे। फिलहाल भोपाल अस्पताल में उनका इलाज जारी है। इधर गम जदा परिवार वाले और रिश्तेदार भी इस घटना के बाद राहत महसूस कर रहे हैं।
कटनी में भी आया था लापरवाही का मामला:—
इससे पहले मध्यप्रदेश के कटनी के जिला अस्पताल से भी मार्च में एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आ चुका है, यहां डॉक्टरों की लापरवाही की हद तब हो गई जब उन्होंने ने जिंदा व्यक्ति का ही डेथ सर्टिफिकेट बना डाला।
सर्टिफिकेट में इसी व्यक्ति का ही पीएम होना भी दर्शा दिया। जबकि मृत्यु उसके भाई की हुई थी। अब वह खुद का जिंदा बताकर भाई का डेथ सर्टिफिकेट लेने अस्पताल के चक्कर लगा रहा। डेथ सर्टिफिकेट न मिलने से बीमा समेत अन्य क्लेम के कार्य रुके हैं।
जानकारी के अनुसार कुठला थाना अंतर्गत चाका मॉडल रोड पर 11-12 फरवरी दरमियानी रात बाइक सवार युवक ट्रक की चपेट में आ गया था। घटनास्थल पर ही युवक की मौत हो गई थी। पुलिस ने पूछताछ के दौरान युवक की शिनाख्त शैलेंद्र परोहा पुत्र रामनाथ परोहा निवासी मोहनिया गांव थाना स्लीमनाबाद के रूप में हुई थी। शैलेंद्र कुठला स्थित प्रचंड इंटरप्राइजेज कोयला प्लांट में काम करता था। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते शैलेंद्र की बजाय उसके सगे भाई राममोहन परोहा का लिखापढ़ी में पीएम कर दिया। डॉक्टरों की लापरवाही का खामियाजा पूरा परिवार भुगत रहा है।
इसके बाद से जिला अस्पताल के डॉक्टरों कार्यप्रणाली और उनके सिस्टम पर सवालिया निशान उठने शुरू हो गए। पुलिस ने लिखापढ़ी में शैलेंद्र का ही जिक्र किया था। अभिलेख में सब कुछ सही होने के बाद डॉक्टरों ने पीएम रिपोर्ट में मृतक शैलेंद्र की बजाय उसके जिंदा भाई राममोहन का पीएम कर सर्टिफिकेट थमा दिया। इसके पूर्व जिला अस्पताल एक डॉक्टर ने जिंदा बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। परिजनों ने निजी चिकित्सालय में इलाज कराया तो बच्चा जीवित निकला। कुछ दिनों पूर्व ही इस मामले ने तूल पकड़ा था। जिससे बाद जिला अस्पताल की काफी किरकिरी हुई थी।
जिंदा भाई राममोहन अस्पताल में चक्कर लगाकर परेशान हो रहा है। उधर डॉक्टर राममोहन से आईडी प्रूफ सहित अन्य कागजात बी जमा करा लिए। इतना ही नहीं राममोहन कलेक्टर, सीएमएचओ, सिविल सर्जन समेत अन्य अफसरों को भी अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन सब एक दूसरे पर टाल रहे हैं। राममोहन की कहानी सुनने के बाद कुछ लोग हंसकर सरकारी सिस्टम को कोस रहे हैं। डेथ सर्टीफिकेट न मिलने से परिजनों को बीमा सहित अन्य क्लेम के लिए भटकना पड़ रहा है।
Published on:
12 Sept 2017 05:11 pm
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