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लोधी, पाटीदार और कुशवाहा के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की रणनीति

क्षेत्रीय संतुलन बैठाने और नाराज वर्ग को संतुष्ट करने की कोशिश!

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भोपाल. चुनावी साल में मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कवायद हुई है। प्रदेश की आधी आबादी यानी 50.25 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग से है। इसमें भी लोधी, पाटीदार और कुशवाहा समाज का हिस्सा 9 से 10 फीसदी बैठता है। इसे साधने की झलक मंत्रिमंडल विस्तार में नजर आई है। क्षेत्रीय संतुलन बैठाने और नाराज वर्ग को संतुष्ट करने की कोशिश भी है, लेकिन संतुलन सधने की बजाय बिगड़ता ज्यादा नजर आ रहा है।
विस्तार की सूची तो ३१ जनवरी को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मुख्यमंत्री के साथ बैठक के समय ही फाइनल हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक कुशवाहा समाज से किसी एक चेहरे को लेना तय हुआ था। तोमर की इच्छा ग्वालियर से भरत सिंह कुशवाहा को लेेने की थी, लेकिन पार्टी उनके नाम पर सहमत नहीं हुई। तब इंदौर से महेंद्र हार्डिया के नाम पर विचार हुआ। हार्डिया से सुमित्रा महाजन और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी बढऩे की आशंका थी, लिहाजा आखिर में सीएम ने नारायण सिंह कुशवाहा का नाम रखा। इस पर तोमर भी सहमत हो गए। तोमर ने शुक्रवार को ही नारायण सिंह कुशवाहा को दिल्ली बुलाकर यह जानकारी दे दी थी, उसके बाद वे दिल्ली से भोपाल शपथ लेने पहुंचे।

हार्दिक फैक्टर से बालकृष्ण को मौका
मालवा-निमाड़ से कई दिग्गज दावेदार थे, लेकिन हार्दिक पटेल फैक्टर को साधने के लिए पार्टी की नजर दो महीने से खरगोन विधायक बालकृष्ण पाटीदार पर थी। हार्दिक ने गुजरात चुनाव में जिस तरह भाजपा को नुकसान पहुंचाया और मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा उसे प्रदेश में सक्रिय करने का एेलान के बाद ऐसा किया गया। प्रदेश में लगभग ४ फीसदी आबादी पाटीदार- कुर्मी वर्ग की है। किसान आंदोलन में भी इस वर्ग की सक्रियता नजर आई थी और मालवा में हुए झाबुआ लोकसभा उपचुनाव से लेकर निकाय चुनावांे में भी पाटीदार वर्ग की भाजपा से दूरी का असर पार्टी को देखने को मिला था।

लोधी वोट और प्रहलाद के दबाव में जालम की एंट्री
इस समय शिवराज मंत्रिमंडल में लोधी वर्ग से कुसुम मेहदेले हैं, लेकिन स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें रिटायरमेंट दिया जा सकता है। एेसे में लोधी वर्ग पर पकड़ बनाने और महाकौशल क्षेत्र से प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए जालम सिंह पटेल को मौका दिया गया है। हालांकि जालम के बड़े भाई प्रहलाद पटेल के दिल्ली में बढ़े वजन की भी भूमिका है। पिछले दिनों उमा भारती की मध्यप्रदेश में दिखी सक्रियता के चलते लोधी वर्ग को महत्व देना भी एक अहम कारण माना जा रहा है।

जिसके लिए विस्तार, वही नहीं ले पाया शपथ
मंत्रिमंडल विस्तार का आनन-फानन कार्यक्रम अशोकनगर विधायक गोपीलाल जाटव को लेकर किया गया। उम्मीद थी इससे उपचुनाव में फायदा मिलेगा, लेकिन कांग्रेस की सक्रियता से जाटव के नाम पर पेंच फंस गया। मंत्री न बन पाए गोपीलाल जाटव खासे दुखी हैं। उन्होंने पत्रिका से कहा, कांग्रेस ने चुनाव आचार संहिता की शिकायत करके मुझे मंत्री बनने से रुकवा दिया। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है, वक्त आने पर फिर मिलेगा। मुख्यमंत्रीजी ने जल्द ही अगले विस्तार बात कही है। मुझे उम्मीद है तब मंत्री बनने का मौका मिल जाएगा।

इंदौर-मालवा में बढ़ेगी नाराजगी
इस विस्तार से असंतुलन बढ़ा ही है। कैलाश विजयवर्गीय के केंद्रीय संगठन में जाने के बाद से ही कैबिनेट में इंदौर का प्रतिनिधित्व खत्म है। पिछले विस्तार में भी इंदौर को जगह नहीं मिली और इस बार भी। जबकि ग्वालियर शहर से अब ३ मंत्री हो गए हैं। एेसे में इंदौर क्षेत्र से नाराजगी बढऩा लाजमी है। इंदौर संभाग से सिर्फ दो मंत्री हैं जबकि उज्जैनसे एक मंत्री कैबिनेट में है। रतलाम, मंदसौर, नीमच से एक मंत्री और शामिल किए जाने की संभावना थी, लेकिन मालवा को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

भाजपा का असली चाल-चेहरा चरित्र उजागर
इस विस्तार पर कांग्रेस का आरोप है कि मंत्रिमंडल में दागी को स्थान देकर भाजपा का असली चाल, चेहरा और चरित्र उजागर हो गया है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश का मंत्रिमंडल आरोपियों और दागियों की शरण स्थली बन गया है।

राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले जालम सिंह पटेल और उनके पुत्र पांच माह पहले तक एसआईटी पुलिस के रिकार्ड में फरार थे। फरार आरोपी को मंत्री बना देना आश्चर्य है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के हाथों पहला अपराध मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दागियों को शपथ दिलाकर करवा दिया। इसी तरह नारायण सिंह कुशवाहा के दामाद एक हजार करोड़ के चिटफंड के आरोप हैं और इन दिनों जेल में है। इसके पूर्व मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री लालसिंह आर्य हत्या के आरोपी हैं।


मंत्री रहते हुए ही उन्हें पुलिस ने फरार घोषित कर रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें सरंक्षण देकर मप्र के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा था।प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि जालम सिंह पटेल पर दर्जनों गंभीर अपराध दर्ज हैं। कई मामलों में वह फरार हैं, इसके बावजूद उन्हें मंत्री बना दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य में विधानसभा उप चुनाव के चलते मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किए गए मंत्रिमंडल विस्तार को अवैध घोषित किए जाने के लिए विधि विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं।

उपचुनाव के ६० हजार वोटों पर नजर
सरकार ने इस मंत्रिमंडल विस्तार से मुंगावली-कोलारस के उपचुनाव में भी लोधी-कुशवाहा वोटों को साधने की कवायद की है। दोनों सीटों पर दोनों समाज के लगभग ६० हजार वोट हैं। सूत्रों के मुताबिक शपथ ग्रहण के तत्काल बाद नारायण सिंह कुशवाहा और जालम पटेल को तत्काल मुंगावली-कोलारस पहुंचने और अपने समाज के मतदाताओं के बीच जाकर उन्हें साधने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और जालम पटेल के बड़े भाई प्रहलाद पटेल को शपथ ग्रहण के ठीक बाद सीएम हाउस बुलाया था। दोनों के बीच तकरीबन एक घंटा मंत्रणा हुई है।