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ऐसे शिक्षक जो पीढ़ी दर पीढ़ी से जगा रहे शिक्षा की अलख

टीचर डे आज: किसी के नाना, पिता, मां और बहनें तो किसी का पूरा परिवार ही शिक्षक

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ऐसे शिक्षक जो पीढ़ी दर पीढ़ी से जगा रहे शिक्षा की अलख

ऐसे शिक्षक जो पीढ़ी दर पीढ़ी से जगा रहे शिक्षा की अलख

भोपाल. एक शिक्षक ही है जो मनुष्य को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाता है और जीवन में सही और गलत को परखने का तरीका बताता है। कहा जाता है कि एक बच्चे के जीवन में उसकी पहली गुरु मां होती है, जो हमें इस संसार से अवगत कराती हैं। वहीं दूसरे स्थान पर शिक्षक होते हैं, जो हमें सांसारिक बोध कराते हैं यानी जीवन की महत्वता को बताते हैं। एक अच्छा शिक्षक समाज में अच्छे इंसान बनने और देश के अच्छे नागरिक बनने में हमारी मदद करता है। आज शिक्षक दिवस है। पत्रिका ने शहर के उन शिक्षकों से बात की, जिसका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी से समाज में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इन शिक्षकों का मानना है कि वे देश की युवा पीढिय़ों में ज्ञान ज्योति जगाते हैं। सभी उम्मीद करते हैं कि शिक्षक नए आदर्श और कीर्तिमान स्थापित करें। जीवन में शिक्षा और शिक्षकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षकों को हमेशा विशेष प्रयास करने होंगे।

तीन बहनों के साथ, बुआ और भांजी भी हैं शिक्षिका
&मेरे परिवार में तीन पीढिय़ां शिक्षक हैं। मेरी बुआ डॉ. मुक्ति सिंह और मेरी भांजी भी टीचर हैं। साथ ही मेरी दोनों बहनें भी टीचिंग ही करती हैं। मैं सरोजनी नायुडू स्कूल में पदस्थ हूं। मैंने बुआ से प्रभावित होकर टीचिंग बनने का सपना देखा था। क्योंकि बुआ के पास ही रहती थी। वो संस्कृत पढ़ती थी। और फिर संस्कृत की टीचर बनीं। तभी से संस्कृत के प्रति लगाव हो गया था। मुझे देखकर ही मेरी भांजी आस्था खत्री भी कॉमर्स की टीचर बनीं हैं।
दीप्ति अग्निहोत्री, प्रसिडेंट अवार्डी टीचर

पिता के स्कूल में पढ़कर जाना शिक्षा का महत्व
शिक्षक बनने की प्रेरणा मुझे पिता से मिली। वे प्रायमरी स्कूल में टीचर थे। वहां दस किमी के दायरे में कोई स्कूल नहीं था। मैंने पिता के स्कूल में ही प्रायमरी तक पढ़ाई की थी। तब शिक्षा का महत्व जाना। पिता के कहने पर ही शिक्षक बनने का फैसला लिया। मैं पिछले 22 साल से सेवाएं दे रहा हूं।
सीएल चौरे, शिक्षक

नाना और मां भी रहीं प्रिंसिपल
&मेरी तीन पीढिय़ां शिक्षक के रूप में काम कर रही हैं। नाना और मां भी प्रिंसिपल रहीं। नाना को देखकर ही मां भी टीचर बनीं। मां को देखकर मैंने भी टीचिंग करने का फँैसला लिया। 31 सालों से टीचिंग कर रही हूं। मॉडल स्कूल में 11 और 12वीं क्लास को भौतिक शास्त्र की शिक्षा दे रही हूं। एक शिक्षक से समाज को बहुत उम्मीदें होती हैं। वे देश की युवा पीढिय़ों में ज्ञान ज्योति जगाते हैं। सभी उम्मीद करते हैं कि टीचर्स स्टूडेंट्स के लिए आदर्श बनें।
पूनम अवस्थी, शिक्षिका