
हजारों कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और वेतन वृद्धि में अड़ंगा
मध्यप्रदेश के हजारों कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और वेतन वृद्धि में अड़ंगा आ गया है। प्रदेश के स्थाईकर्मियों के वेतनमान पर नौकरशाही का अड़ंगा लगा है। स्थिति ये है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर साबित हो गए हैं। ऐेसे में प्रदेशभर के कर्मचारी अब बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं।
एमपी के स्थाईकर्मियों को सातवां वेतनमान का लाभ मिलना है। राज्य सरकार लाभ देना भी चाहती है, सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुका है, लेकिन इसमें नौकरशाही का अड़ंगा लग गया है। कोर्ट के आदेश के छह साल बाद भी इनकी फाइल एक चेम्बर से दूसरे चेम्बर में घूम रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एक फैसले में कहा था कि राज्य के स्थाई कर्मचारियों को दिसंबर 2016 से सातवे वेतनमान का लाभ दिया जाए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कोर्ट के इस आदेश को तत्काल लागू कर दिया। लेकिन, अन्य विभागों में इसे लागू नहीं किया। वे इसके लिए सरकार से परामर्श करते रहे, अब यह फाइल ठण्डे बस्ते में है।
यह लाभ मिलना है:
स्थाईकर्मियों को 2016 से एरियर सहित सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाना है। कोर्ट के निर्देश के बाद फाइल आगे बढ़ी। लेकिन, कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी।
सातवें वेतनमान का 38 प्रतिशत महंगाई भत्ता
सातवें वेतनमान का प्रारूप सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार किया है। वर्तमान देय मूल वेतन और 212 प्रतिशत महंगाई भत्ता में मूल वेतन पर सातवें वेतनमान का 38 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। वर्तमान मूल वेतन पर 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि मिलेगी।
चुनावी वर्ष में अब स्थाईकर्मी लामबंद हुए हैं। उन्होंने अगले माह बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। मप्र कर्मचारी मंच के प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे का कहना है कि सातवें वेतनमान की मांग पुरानी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार 10 दिन में सातवें वेतनमान का लाभ 2016 से एरियर सहित नहीं देती तो भोपाल में महाधरना आंदोलन होगा।
अभी ये है वेतनमान
अकुशल स्थाईकर्मी: 4000 मूल वेतन और डीए
अर्ध कुशल स्थाईकर्मी: 4500 मूल वेतन और डीए
कुशल स्थाईकर्मी: 5000 मूल वेतन और डीए
Published on:
30 Aug 2023 10:02 am
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