इन कविताओं में अंग्रेजों के देश में आने, फूट डालो राज करो नीति, शोषण, गुलामी और आजादी की दास्तान को समेटा गया है। इन्हीं कविताओं को आधार बनाकर इन दिनों ट्राइबल म्यूजियम में एक चित्र शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस कैम्प में गोंड और भील जनजाति के साथ ही महाराष्ट्र, बिहार, उड़ीसा और आंध्रप्रदेश के आदिवासी कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।