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दिलचस्प हैं इनके राजनीति के किस्से, देश के लिए कई बार बनी संकटमोचक

14 फरवरी को विदिशा से सांसद रही सुषमा स्वराज की जयंती है...। इस मौके पर जानते हैं उनसे जुड़े कुछ किस्से...।

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भोपाल

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Manish Geete

Feb 14, 2022

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भोपाल। मध्यप्रदेश के विदिशा-रायसेन से भाजपा की संसद रही सुषमा स्वराज को कोई नहीं भूल सकता। वे अपनी वाक कला से किसी को भी सम्मोहित कर लेती थीं। उनके प्रखर भाषणों में जो कटाक्ष होते थे, वे आज भी आज किए जाते हैं। महज 25 साल की उम्र में वे कैबिनेट मंत्री बन गई थीं।

एक किस्सा सीरीज के अंतर्गत पत्रिका.कॉम आपको बता रहा है तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से जुड़े दिलचस्प किस्से...।

किस्सा-1
48 देशों के लोगों की जान बचाई

2015 में जब सुषमा विदेश मंत्री थी, तब यमन में युद्ध जैसे हालात बन गए थे और यमन सरकार और विद्रोहियों में जंग छिड़ गई थी। उन हालातों में हजारों भारतीय जिंदगी और मौत के बीच फंस गए थे। वहां फंसे भारतीयों ने भारत सरकार से मदद मांगी। ऐसे में एक संदेश मिलते ही सुषमा एक्टिव हो गईं औरदिन-रात अपने नागरिकों को बचाने में जुट गीँ। उसी रात प्लानिंग हुई और ऑपरेशन 'राहत' तैयार कर लिया। सुषमा ने विदेश राज्यमंत्री एवं पूर्व आर्मी चीफ वीके सिंह को यमन भेजा।

इंडियन एयरफोर्स के विमानों ने उस देश की जमीन पर कदम रखा और अपने 4640 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। भारतीयों के साथ ही 48 देशों के 2000 से अधिक नागरिक भी फंसे थे, उन्हें भी एयरफोर्स की मदद से एयरलिफ्ट कर लिया गया। इतनी संख्या में एयरलिफ्ट करने का यह आपरेशन दुनियाभर में याद किया जाता है।

किस्सा-2
पाकिस्तान में था यह भारतीय

मुंबई निवासी हामिद अंसारी कथित तौर पर ऑनलाइन दोस्त बनी लड़की से मिलने 2012 में अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान पहुंच गया था। बाद में बगैर वीजा के उन्हें पकड़ लिया। सजा पूरी होने के तीन साल बाद भी रिहाई नहीं होने की खबर जब सुषमा तक पहुंची तो विदेश मंत्री ने पहल की और 18 दिसंबर 2018 को उस युवक को आजाद करवा लिया। इसके बाद हामीद के माता-पिता विदेश मंत्रालय में सुषमा से मिलने आए, जहां अंसारी की मां ने कहा 'मेरी मैडम महान'।

किस्सा-3
मूक-बधिर लड़की को मिल गई असली मां

-सुषमा की मदद का यह किस्सा भी दुनियाभर में चर्चित रहा। एक मूकबधिर बच्ची गीता भटकते हुए पाकिस्तान की बार्डर में पहुंच गई थी। कुछ बोल नहीं पा रही थी और कुछ समझ नहीं पा रही थी। वहां उसे ईदी फाउंडेशन में पहुंचा दिया गया। जब पाकिस्तान से यह खबर आई खी एक भारतीय बच्ची गीता यहां पहुंच गई है, तो विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा ने कहा था कि वो मेरी बेटी है और मैं उसे भारत लेकर आउंगी और उसके माता-पिता तक पहुंचाउंगी। गीता सुषमा स्वराज के जीते जी तो भारत आ गई, लेकिन अभी उसके असली माता-पिता से मिलना बाकी था। अततः महाराष्ट्र में उसकी असली मां मिल गई और अब वो अपनी मां के साथ समय गुजार रही है।

किस्सा-4

तो सिर मुंडाकर सफेद साड़ी पहनेंगी

चुनावों का वक्त था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए ने बीजेपी के एनडीए गठबंधन को हरा दिया था। उस समय कांग्रेस की प्रमुख सोनिया गांधी सरकार का नेतृत्व करने वाली थीं। तब बीजेपी सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नहीं बनने देने की बात पर अड़ गई थी। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे थे, विदेशी का मुद्दा चारों तरफ छा गया था। तब सुषमा स्वराज के एक बयान ने काफी सुर्खियां बटौरी थीं। सुषमा ने कहा था कि "संसद सदस्य बनकर अगर संसद में जाकर बैठती हूं तो हर हालत में मुझे उन्हें माननीय प्रधानमंत्री जी कहकर संबोधित करना होगा, जो मुझे गंवारा नहीं होगा। सुषमा ने यह भी ऐलान किया था कि यदि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन जाती हैं तो मैं सिर मुंडवा कर सफेद साड़ी पहनेंगी, भिक्षुणी की तरह जमीन पर सोएंगी और सूखे चने खाकर गुजारा करेंगी। सुषमा का यह बयान आज भी राजनीतिक लोगों में चर्चित है।

किस्सा-5
जब कन्नड़ भाषा सीखी

कर्नाटक के बेल्लारी से सोनिया गांधी के सामने चुनाव लड़ रही थी। तब जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने चंद दिनों में ही कन्नड़ भाषा सीख ली। कांग्रेस के गढ़ वाली इस सीट पर सोनिया की जीत तय थी। वे धाराप्रवाह कन्नड़ में भाषण देने लगी थीं। स्वराज ने सोनिया के खिलाफ विदेशी मूल पर मुद्दा उठाते हुए विदेशी 'बहू और देसी बेटी' का नारा दिया था। सुषमा 56 हजार से अधिक वोटों से चुनाव हार गई थीं। लेकिन, उनके एक बयान से वे सभी का दिल जीत कर चले गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भले ही वो हार गईं, लेकिन संघर्ष उनके नाम रहा।

यह भी है किस्से

हरियाणा की लड़की ने किया था प्रेम विवाह

1975 में हरियाणा ऐसा राज्य था, जहां प्रेम विवाह तो सोचना भी बड़ा गुनाह माना जाता था। उसी दौर में इस दबंग लड़की ने प्रेम विवाह जैसा कदम उठाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुषमा की पहली मुलाकात स्वराज कौशल से पंजाब विश्वविद्यालय में कानून की शिक्षा के दौरान हुई थी। चंडीगढ़ में साथ-साथ पढ़ाई के दौरान दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। उनकी शादी 13 जुलाई 1975 को हुई थी। दोनों को ही अपने-अपने परिजनों को शादी के लिए मनाने में काफी मेहनत करना पड़ी थी। खासकर हरियाणा की सुषमा स्वराज के परिवार में। बाद में स्वराज कौशल बड़े राजनीतिज्ञ बने और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील भी। छह साल तक राज्यसभा सांसद रहते हुए वे मिजोरम के राज्यपाल भी रहे।

सुषमा के फैसले से पति हुए थे खुश

विदिशा से सांसद रही सुषमा ने जब पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी, तब उनके पति स्वराज कौशल बेहद खुश हो गए थे। उन्होंने तत्काल ही ट्वीट कर कहा था कि चुनाव नहीं लड़ने के आपके फैसले के लिए धन्यवाद। मुझे याद है एक समय मिल्खा सिंह को भी रुकना पड़ा था। यह दौड़ 1977 से शुरू हुई थी। इसे अब 41 वर्ष हो गए हैं। आप अब तक 11 चुनाव लड़ चुकी हैं। दो बार 1991 और 2004 में चुनाव नहीं लड़ा। क्योंकि पार्टी ने आपको नहीं उतारा। मैं 46 वर्षों से आपके पीछे भाग रहा हूं। अब मैं 19 वर्ष का नहीं हूं। थैंक्यू मैडम।

मुख्यमंत्री ने किया याद

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को सुषमा स्वराज के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। चौहान ने अपने ट्वीट संदेश में कहा है कि पूर्व विदेश मंत्री, पद्म विभूषण सम्मानित, आदरणीया दीदी श्रीमती सुषमा स्वराज जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। राष्ट्र सेवा, गरीब कल्याण के प्रति समर्पित आपका आदर्श जीवन सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करता रहेगा।

सरस्वती जिह्वा पर बैठी हो

चौहान ने उनके साथ बिताए दिनों को याद किया। चौहान ने तस्वीरों के साथ लिखा है कि जब आदरणीय सुषमा दीदी बोलती थीं, तो ऐसा प्रतीत होता था कि मानो मां सरस्वती उनकी जिह्वा पर विराजमान हैं। उनके व्यवहार में हम सभी के लिए न केवल बहन का प्यार अपितु ममत्व का पवित्र भाव आकण्ठ भरा था। आप सदैव हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी। जयंती पर दीदी के चरणों में प्रणाम!