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swachh survekshan 2019 : स्वच्छता अभियान में पिछड़ा शहर

स्वच्छता सर्वेक्षण- ३१ जनवरी तक तय हो जाएगी रैंकिंग, अफसर-जनप्रतिनिधियों में नहीं दिख रहा रूझान  कमिश्नर लवानिया के बदलने के बाद दत्ता मैदानी फीडबै

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Svachchhata survey team inspected

Svachchhata survey team inspected

भोपाल। स्वच्छता सर्वे २०१९ में नंबर वन बनने के लिए भोपाल को इंदौर और मौजूदा रेंक पर टिके रहने के लिए जबलपुर शहर से चुनौतियां मिल रही हैं। देश के चौथे स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्र सरकार ने १७ मुद्दों का जो नया फार्मेट जारी किया है उसमें प्रदेश से इंदौर और जबलपुर शहर अब तक की समीक्षा में खरे उतरे हैं। दिल्ली से आए केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण मिशन के आब्जर्वर श्याम दुबे ने इन कमियो� �� पर भोपाल को आइना दिखा दिया है। अब तक की समीक्षा में भोपाल की स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी कमजोर पाई गई है।

इस कमिश्नर अविनाश लवानिया के तबादले के बाद नए निगमायुक्त बी विजय दत्ता अभी भी मैदानी फीडबैक लेकर चीजों को समझ रहे हैं। इधर एक भी जनप्रतिनिधि इस बार स्वच्छता का संदेश लेकर जनता के बीच नहीं गया। खुले में कचरा फेंकने और शौच को रोकने रोको टोको जैसा कोई अभियान भी नहीं चलाया ग या। केंद्र सरकार ने इस बार सर्वेक्षण का फार्मेट भी बदल दिया है, कुल १२ बिंदुओं वाले इस फार्मेट में खरा उतरने के लिए भोपाल को अगले १८ दिन कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। चौथे स्वच्छता सर्वेक्षण की सभी कार्रवाई इस बार ३१ जनवरी तक पूरी हो जाएगी और फरवरी में परिणाम जारी होंगे। केंद्र की १२ चुनौतियों का शहर में हाल १- डोर टू डोर कचरा- कचरा संग्रहण करने बीएमसी के एक हजार हॉकर्स हाथ ठेला लेकर ८५ में से आधे वार्डों में ही प्रतिदिन पहुंच पाते हैं।

२- मौके पर बंटवारा- वेस्ट कलेक्शन साइट पर गीले, सूखे, ई-वेस्ट, मेडिकल वेस्ट का बंटवारा। शहर में गीला-सूखा और मेडिकल वेस्ट सेग्रीगेशन नहीं हो पा रहा है। ३- दो बार झाडू लगाना- बाजार, गार्डन, रास्तों, सरकारी परिसरों के बाहर दिन में दो बार झाडू लगाना। शहर में ये व्यवस्था चुनिंदा स्थानों पर एक बार तक सीमित है। ४- नीला-हरा डस्टबिन- बाजार, दफ्तर, स्कूल, कालोनियों से ५० से १०० मीटर की दूरी पर नीला-हरा जुड़वा डस्टबिन रखना अनिवार्य। शहर में इनकी संख्या १२०० है। ५- ठोस प्रबंधन- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए आदमपुर में एस्सेल गु्रप का प्लांट २०१९ के अंत तक चालू करने की योजना है।

पिछले तीन सर्वे से भोपाल को इस श्रेणी में अंक नहीं मिल रहे हैं। ६- प्लास्टिक प्रतिबंध- प्लास्टिक का पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं हो पाया है। बोतल क्रश करने की तीन मशीनें ही स्थापित हुई हैं। ७- वैज्ञानिक लेंडफिल- भानपुर की पुरानी खंती को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने का काम जारी है। आदमपुर में इस साल काम शुरु नहीं हो सकेगा। ८- डंप साइट का उपचार- शहर में एेसे १२ घोषित कचरा स्टेशन हैं जहां से आदमपुर ले जाने कचरा उठता है। इन साइट की जमीनों के वैज्ञानिक उपचार के लिए अभी कोई प्रबंध नहीं है। खाद बनाने वाले सेंटर बंद हैं।

९- नागरिक शिकायत तंत्र- बीएमसी कॉल सेंटर नंबर १८००२३३००१४ संचालित है। यहां से शिकायतें एएचओ को भेजी जाती हैं। ४८ घंटे के अंदर रिस्पांस का दावा है। १०- नालों का चैनलाइजेशन- बरसाती पानी को भराव से रोकने शहर के नाले नालियों का चैनलाइजेशन। शहर में अमृत प्रोजेक्ट के तहत ये काम जारी है। ११- तीन आर प्रणाली- कचरा प्रबंधन के लिए रिड्यूज, रियूज और रिसाइकल प्रणाली फिलहाल शुरु नहीं हो सकी है। १२- सौंदर्यीकरण- सार्वजनिक स्थलों की दिवालों पर चित्र बनवाने के साथ सड़कों के दोनों ओर ग्रीनरी विकसित करना।

अफसरों ने मौके पर किया निरीक्षण इधर शुक्रवार को जिन स्थानों पर पहुंचकर केंद्रीय आब्जर्वर श्याम दुबे ने बीएमसी को खामियां गिनाई थीं वहां शनिवार को अफसर दोबारा पहुंचे। अपर आयुक्त एमपी सिंह ने मौके पर संबंधित एएचओ और सुपरवाइजरों को बुलाकर कमियों पर सवाल जवाब किए। जवाब नहीं देने वाले कर्मचारियों की वेतन कटौती के निर्देश दिए गए हैं। सिंह ने अन्ना नगर, शबरी नगर, बिट्टन सब्जी मार्केट, मीट मार्केट, रेलवे स्टेशन, नादर� � इलाकों के कई पाइंट चेक किए।

स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास जारी है। आब्जर्वर ने जिन स्थानों पर कमियां बताई थीं वहां व्यवस्थाएं सुधारी जा रही है। अधिकारियों में तालमेल की कोई कमी नहीं है। एमपी सिंह, अपर आयुक्त, हेल्थ

शहर को नंबर वन बनाने इस बार भी मुहिम चलाई जाएगी। कार्यक्रम तय हो गया था लेकिन इसमें कुछ विलंब हुआ है। अगले सप्ताह से इस पर काम शुरू हो जाएगा। आलोक शर्मा, महापौर