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13 वाद्ययंत्रों से मंच पर हुआ ‘ स्वरानंद’

शहीद भवन में संगीत समागम और सम्मान समारोह का आयोजन
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'Swaranand

13 वाद्ययंत्रों से मंच पर हुआ ' स्वरानंद'

भोपाल। शहीद भवन में गुरुवार को नाद ज्योति संगीत संस्थान की ओर से संगीत समागम और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ गायिका मीरा राव और वायलिन वादक पंडित देशराज वशिष्ठ को नाद साधना सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साहित्यकार संतोष चौबे और विशिष्ट अतिथि संगीतज्ञ किरण देशपांडे,

सिद्धराम स्वामी कोरवार और सज्जनलाल ब्रहृाभट्ट मौजूद रहे। संगीत सभा की शुरुआत स्वरानंद से हुई। इस समूह में 7 सितार वादक, 2 तबला वादक, 1 घटम वादक, 1 ढोलक और 2 गायक थे। समूह ने प्रस्तुति की शुरुआत राग हंसध्वनि पर सरगम की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम को विस्तार देते हुए चार रागों की राग माला में लोक धुन सुनाई। इसमें राग भोपाली, राग कलावती, राग देस और राग जोग का संगम था। प्रस्तुति के अंत में राग यमन कल्याण पर फ्यूजन पेश किया गया।

तराना और ठुमरी पर कथक
अंत में देशराज ने श्याम मोहे छेड़ गयो... धुन बजाकर प्रस्तुति को विराम दिया। मुंबई की प्राची शर्मा ने कथक पेश किया। गणेश वंदना से शुरुआत करते हुए प्राची ने तराना और ठुमरी पर कथक किया। ठुमरी के बोल काहे रोकत नंदलाल मेरे... थे। इसके बाद अपने साथी कलाकारों के साथ उन्होंने राग दरबारी में निबद्ध तराने पर नृत्य पेशकर प्रस्तुति को विराम दिया।


तबला वादन में परन और टुकड़ों की प्रस्तुति
अगली कड़ी में समूह के पांच तबला वादकों ने तीन ताल में उठान, पेशकार, कायदा, रेला के बाद मध्य लय में परन और टुकड़ों की प्रस्तुति दी। अंत में द्रुत लय के साथ ठेका के प्रकार, लग्गी और तिहाईयों से प्रस्तुति को विराम दिया। इसके बाद वायलिन वादक पंडित देशराज वशिष्ट ने राग देस का चयन करते हुए विलंबित रचना बजाई। वहीं, तीन ताल में मध्य लय की रचना ने श्रोताओं को वायलिन की धुन में बांध लिया।