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भोपाल। राजधानी भोपाल में Swine Flu से अब तक 9 पीडि़तों की मौत हो चुकी है। वहीं Swine Flu संदिग्ध चार नए मामले भी सामने आए हैं। दूसरे राज्यों के बाद मध्यप्रदेश पर हावी हो रहे Swine Flu को लेकर राज्य सरकार अलर्ट हो गई है। शुक्रवार को खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने स्वाइन फ्लू पर रिव्यू मीटिंग आयोजित कर, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं लोगों से भी इसके लक्षणों को लेकर जागरूक रहने की अपील की है। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट कहती है कि राजधानी के युवा बीमारियों से लडऩे की क्षमता खो रहे हैं, इसलिए Swine Flu ही नहीं वायरस जनित हर रोग भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में नैचुरापैथी एक्सपर्ट काकोली के ये टिप्स आपको रखेंगे सेफ...
पहले जानें ये
मप्र स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक डॉक्टर्स यही मानते थे कि स्वाइन फ्लू हो या अन्य किसी भी वायरस जनित रोग से पीडि़त होने पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों या फिर बुजुर्गों की जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। क्योंकि उम्र के इन दोनों ही पड़ावों में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है, नतीजा वायरस जनित रोग उन पर हावी हो जाते हैं। डॉक्टर्स की इस धारणा के विपरीत अब 20-40 साल तक के लोगों में भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता तेजी से कम हो रही है। वे सेहत को लेकर जागरूक नहीं हैं। खान-पान में लापरवाही, प्रोपर डाइट की कमी युवाओं के भविष्य को संकट में ला रही है।
ऐसे बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
काकोली कहती हैं कि किसी भी रोग से लडऩे के लिए हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना जरूरी है। संतुलित आहार और व्यायाम ही इसे मजबूत रखने का एक मात्र उपाय है। संतुलित आहार यह सुनिश्चित कर देता है कि अस्थि मज्जा में जहां व्हाइट ब्लड सेल्स बनती हैं, पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पहुंचें। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कब और क्या खाएं...
1. प्रोटीन
* इम्यून सिस्टम को बढ़ाने के लिए प्रोटीन की खुराक बेहद जरूरी है।
* यह व्हाइट ब्लड सेल्स को बनाने वाला अहम तत्व है। इसके लिए आप अंडे, दूध, हरी और पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।
* अनसैचुरेटेड या गुड फैट का सेवन जरूर करें। सैचुरेटेड फैट जहां दिल की बीमारियों का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ा देती हैं, वहीं अनसैचुरेटेड फैट दिल को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। अगर दिल स्वस्थ तो आप कई गंभीर बीमारियों से बचे रहेंगे। अनसैचुरेटेड फैट के लिए मक्का, तिल, फूल, सोयाबीन और बिनौला के तेल का सेवन बेहद जरूरी है।
2. कार्बोहाइड्रेट फूड को कहें ना
सही मात्रा में गेहूं, मक्का और अनाज खाना व्हाइट ब्लड सेल्स के बनने के लिए जरूरी ऊर्जा पैदा करता है। इनकी जरूरत से ज्यादा खुराक खून में टी-लिम्फोसाइट्स को घटा देती है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।
* कार्बोहाइड्रेट की पूर्ति के लिए लहसुन, अदरक, तुलसी, बादाम, गोभी, रसभरी, दही, रेशी मशरूम आदि को भोजन में शामिल करें। इन खाद्य पदार्थों से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलती है।
3. एंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन
हमारे शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स की जरूरत होती है। इनकी कमी के कारण शरीर कमजोर पडऩे लगता है, जिससे कई रोग हम पर हावी होने लगते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स की पूर्ति के लिए विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्व जरूरी हैं। ये तत्व शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दुरुस्त करने करते हैं।
* बीटा कैरोटीन, विटामिन सी और ई, जिंक और सेलेनियम एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर तत्व हैं।
* ये तत्व कुछ फलों और सब्जियों में मिल सकते हैं या फिर पूरक के तौर पर इनका सेवन किया जा सकता है।
* बीटा कैरोटीन खुबानी, ब्रोकोली, बीट, पालक, हरी मिर्च, टमाटर, मक्का और गाजर में पाया जाता है।
* विटामिन सी जामुन, ब्रोकोली, शफतालू, संतरा, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च, टमाटर, और फूलगोभी में पाया जाता है।
विटामिन ई, ब्रोकोली, गाजर, बादाम, पपीता, पालक और सूरजमुखी के बीज में होता है।
* जस्ता घोंघे, रेड मीट, सेम, बादाम और समुद्री खाद्य पदार्थों में होता है।
* व्हाइट ब्लड सेल्स में मौजूद एंजाइम का महत्वपूर्ण घटक जिंक है, इस खनिज की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। मांस, मछली और दूध जिंक के बेहतर स्रोत हैं। यदि इन चीजों का सेवन नहीं करते हैं तो डॉक्टर्स से सलाह लें।
* कॉपर भी जरूरी। हमारे शरीर को एक निश्चित मात्रा में कॉपर की भी जरूरत होती है। स्वस्थ रहने के लिए यह जरूरी है। हमारे शरीर में कॉपर की कुल मात्रा महज 75-100 मिलीग्राम है। पर यह मात्रा फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज करके और संभवत: उनके खतरनाक असर को कम करके मेटाबोलिज्म और प्रतिरक्षा प्रणाली में बेहद अहम भूमिका निभाती है। मांस, हरी-भरी पत्तेदार सब्जियों और अनाज के सेवन से कॉपर की पूर्ति आसानी से हो जाती है।
ये हैं स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू की गंभीरता को समझने के लिए विशेषज्ञों ने इसे ए, बी और सी तीन कैटेगरी में विभाजित किया है। इनमें से किसी भी कैटेगरी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, तो स्वाइन फ्लू की गंभीरता से निपटा जा सकता है।
* स्वाइन फ्लू : ए
सर्दी, जुकाम, हल्का बुखार और सिर दर्द स्वाइन फ्लू की ए कैटेगरी में शामिल होते हैं।
* स्वाइन फ्लू : बी
इस कैटेगरी को १ और २ कैटेगरी में बांटा गया हैँ।
* स्वाइन फ्लू बी-1 : इस स्थिति तक पहुंचते-पहुंचते जुकाम के साथ तेज बुखार, हाथ और पैरों में दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं।
* स्वाइन फ्लू बी-2 : इस स्थिति तक पहुंचने के बाद मरीज जिन्हें कोई क्रोनिक बीमारी पहले से ही हो खास तौर पर गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग इस कैटेगरी के ज्यादा शिकार होते हैं।
* स्वाइन फ्लू : सी
यह स्वाइन फ्लू की सबसे गंभीर स्थिति है। इस स्टेज तक पहुुंचने पर मरीज को तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी होती है। कफ में खून आ सकता है। मरीज को वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है। जोड़ों में तेज दर्द, नाखूनों में नीलापन आ जाता है। इस स्थिति में मरीज को टेमीफ्लू की जरूरत होती है। वहीं जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है।
इन बातों का विशेष रूप से रखें ध्यान
* खांसते या छींकते समय अपने मुंह, नाक पर हाथ न रखें। बल्कि टिश्यू पेपर या रुमाल का इस्तेमाल करें।
* अपनी आंख, नाक या मुंह को छूने की आदत छोडें। यदि ऐसा करते भी हैं तो पहले हाथों को साबुन से धो लें।
* बीमाार व्यक्ति से दूरियां बनाकर रखें।श्* कोई भी तकलीफ होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
* खूब पानी पिएं।
* पोशक तत्वों से भरपूर भोजन करें।
* भरपूर नींद जरूर लें।
* हाथ मिलाकर किसी से न मिलें।
* गले मिलने या चुंबन लेने से बचें।
* भीड़ वाली जगहों पर न जाएं।
Published on:
26 Aug 2017 02:04 pm
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