
ताजमहल के बंद दरवाजें का रहस्य उजागर, इस खबर को पढ़ने के बाद हो जाएंगे सोचने पर मजबूर
भोपालः सात अजूबों में अपना शुमार रखने वाले ताजमहल को विश्व भर में प्यार की निशानी के रूप में जाना जाता है। इस अद्भुत कारीगरी की मिसाल मानी जाने वाली इमारत को देखने के लिए हर साल दुनियाभर से लाखों लोग आगरा जाते हैं। जितनी अद्भुत कारीगरी इसे बनाने में की गई है। उतनी ही अद्भुत इस इमारत के पीछे का राज़ भी है। कहानियों के अनुसार शाहजहां एक ऐसी इमारत बनाना चाहते थे जिसमें कोई गलती न हो लेकिन मुमताज महल की मजार के ठीक ऊपर छत पर एक छेद है। कहा जाता है कि शाहजहां द्वारा मजदूरों के हाथ काटने की बात सुन एक कारीगर ने जानबूझकर यह छेद किया था, ताकि ताज दोषहीन न रहे। इसी तरह ताज की दीवारों पर बने 11 नक्काशीदार पिल्लरों में से एक का आकार गोल है जबकि अन्य में तिकोनी कटिंग करके डिजाइन बनाया गया है। ताजमहल का एक और राज ये भी है कि ताजमहल के नीचे के कुछ कमरे भी हैं जिन्हें, किसी कारण वश बाद में बंद करवाया है। खैर, इसके पीछे तो कई कयास लगाए गए, लेकिन सच्चाई क्या है, उस पर से अब तक कोई पर्दा नहीं उठा है।
हालांकि, आज तक हममें से कई लोग सिर्फ यही समझते आ रहे होंगे कि, ताजमहल सिर्फ आगरा में ही है। बता दें कि, एक ताजमहल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी है, जिसके भी कई अद्भुत तथ्य हैं। भोपाल को नवाबों का शहर कहा जाता है। यहां कई नवाब और बेगमों ने शासन किया। यहीं वजह है कि, भारत और मध्य प्रदेश का दिल कहे जाने वाले इस शहर में कई खूबसूरत और नायाब इमारतें आज भी हैं। इन्ही इमारतों में से एक है भोपाल का ताजमहल। अब तक कई लोगों को सिर्फ यही पता होगा कि, ताजमहल आगरा में है, जिसे शाहजहां ने प्यार की निशानी के रूप में मुम्ताज की याद में बनवाया था। लेकिन, हम आपको बता दें कि, भोपाल में भी एक ताजमहल है, जिसे किसी बादशाह ने नहीं बल्कि, शहर-ए-भोपाल की बेगम ने बनवाया था। हालांकि, इन दोनो में एक समानता ज़रूर थी कि, इन दोनो का नाम शाहजहां ही है। एक बादशाह शाहजहां थे, जिन्होंने आगरा का ताजमहल बनवाया था और एक भोपाल रियासत की शाहजहां बेगम थीं, जिन्होंने यहां भी एक ताजमहल बनवाया है। हालांकि, यह ताजमहल उन्होंने खुद के रहने के लिए बनवाया था। शहर में स्थित इस ताजमहल के भी कई किस्से हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ताजमहल के एक ऐेसे दरवाजे के बारे में जिसको आज तक कोई भी नहीं खोल पाया है। इतना ही नहीं इस दरवाजे को खोलने में सरकार भी संकोच करती है।
वास्तु कला का है अद्भुत नमूना
शाहजहां बेगम द्वारा बनवाए गए इस ताजमहल को वास्तु कला का एक अद्भुत नमूना कहा जाता है। ना तो इस ताजमहल में कोई मकबरा है और ना ही ये किसी के प्यार की निशनी है। बता दें कि इस ताजमहल में आठ बड़े हॉल के साथ सैकड़ों कमरे बनाए गए हैं। कहा जाता है कि शाहजहां बेगम की सारें बैठकें और शाही मेजबानी इसी महल में हुआ करती थी। इसका निर्माण साल 1871 में शुरू हुआ था और साल 1884 में ये पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया था। पूरे 13 सालों में बनकर तैयार हुआ यह ताजमहल आज सरका की उदासीनता की मार झेल रहा है, वर्ना इसमें की गई कारीगरी भी विश्व प्रख्यात मानी जाती है।
ये ताजमहल पहले था 'राजमहल'
कहा जाता है कि बेगम ने इस ताजमहल का नाम 'राजमहल' रखा था लेकिन इसकी खूबसूरती इतनी ज्यादा थी कि बाद में इसका नाम ताजमहल कर दिया। सत्रह एकड़ में बने इस ताजमहल को बनाने में तीन लाख रुपए का खर्च आया था। महल बनने के बद बेगम इतनी खुश हुईं थी कि उन्होंने तीन साल तक जश्न बनाया था। इस ताजमहल में बाहर से पांच मंजिल और अंदर दो मंजिल है।
हाथी भी नहीं तोड़ सकते हैं इसके दरवाजे
कहा जाता है कि इस ताजमहल की खूबी इसके दरवाजे है। ये दरवाजे एक टन से ज्यादा वजन के हैं। कई सारे हाथी मिलकर भी इन दरवाजों को तोड़ना चाहें तो वे इसको नहीं तोड़ सकते हैं। इन दरवाजों का साइज भी इतना बड़ा है कि 16 घोड़ों वाली बग्गी भी 360 डिग्री में घूम सकती थी। इन दरवाजों को बनाने में की नक्काशी में रंगीन कांच का प्रयोग किया गया था। रंगीन कांचमें जब सूरज की किरणें पड़ती हैं तो रोशनी से उत्पन्न होने वाली चमक लोगों की आंखों पर पड़ती थी। इन दरवाजों से आंदर व बाहर जाने के लिए आपको अपने सिर को झुकाना पड़ेगा।
अग्रेंज भी घुसने में हुए थे नाकाम
एक बार एक अंग्रेज अफसर जब इस ताजमहल को देखने के लिए इसके अंदर गए तो उन्हें इसके दरवाजों से होकर गुजरना था। इस ताजमहल के दरवाजों से प्रवेश करने के लिए झुकना पड़ता है लेकिन अंग्रेज अफसर को ये बात मंजूर नहीं थी। अंग्रेज अफसर ने बेगम से इस दरवाजों के ऊपर बने कांच को तोड़ने के निर्देश दिए लेकिन बेगम ने इस बात से साफ इंकार कर दिया है। कहा जाता है कि रानी के इंकार करने के बाद अंग्रेज अफसर का पारा चढ़ गया और उसे लगातार 100 फायर कर दिए लेकिन तब भी वो इस दरवाजे को नहीं तोड़ सके थे।
Published on:
22 Oct 2018 02:24 pm
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