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आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे…

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस: भारत भवन के बहिरंग में गजल गायक तलत अजीज ने दी परफॉर्मेंस

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talat aziz in bharat bhawan

आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...

भोपाल। बड़ी झील का किनारा, खूबसूरत शाम, हल्की सर्द हवाएं और गजल की महफिल। शहर के गजल रसिक लोगों से भरा भारत भवन का बहिरंग। महफिल में मौसिकी के रंग घोले तलत अजीज ने। उन्होंने कई गजलें सुनाईं। मौका था मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को आयोजित 'यादगार गजलों की शाम' का। श्रोताओं से रू-ब-रू तलत ने कहा कि माहौल देखकर दिल बाग-बाग हो गया। मैं जब यहां आता हूं, तरोताजा होकर जाता हूं। बहुत ही खूबसूरत माहौल बन रहा है।

आपने जिक्र किया है उमराव जान की गजल का, जिंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें... खैय्याम साहब हमारे देश के महान कंपोजर थे। इस कंपोजीन से फिल्म इंडस्ट्री में मेरा इंट्रोडक्शन हुआ था। तो चलिए जिंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें... से सफर शुरू करते हैं। तलत अजीज को सुनने को लिए सैकड़ों की संख्या में श्रोतागण पहुंचे थे।

संस्कृति मंत्री से लेकर पीएस तक ने की फरमाइश

संस्कृति विभाग की मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ से लेकर प्रमुख सचिव पंकज राग तक ने अपनी फरमाइश उनके सामने रखी। इतना ही मंच के सामने श्रोता भी उन्हें अपनी पसंदीदा गजलें सुनाने की फरमाईश करते रहे। उन्होंने किसी को भी निराश नहीं किया। तलत ने मशहूर गायिका नूरजहां का गाया हुआ गाना मैंने एक आशियाना बनाया था, अब भी शायद वो जल रहा होगा... को अलग ही अंदाज में पेश की।

इसके अलावा आज जाने की जिद न करो..., आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे... जैसी मशहूर गजलें भी पेश की। उन्होंने बशीर बद्र को याद करते हुए कहा कि वे मेरे पसंदीदा शायरों में से एक हैं। उनकी कई गजलें मैंने गाई हैं। अभी उनकी तबीयत खराब है। पिछली बार जब मैं यहां आया तो उनके घर गया था। वे किसी को पहचान नहीं पाते थे। जब मैंने उन्हें उनकी रचना सरे राह मुझे कुछ भी कहा नहीं, कभी उसके घर में गया नहीं... सुनाई तो उनके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी। जो मुझे आज तक याद है।