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पीठ में हुक लगाकर और पैरों में कील की चप्पल पहनकर खीचा रथ, ऐसे भी होती है आराधना

- माता मारिअम्मन की आठ दिवसीय आराधना के समापन पर तमिल समाज ने निकाली रथयात्रा- गूंजे मां के जयकारे, बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु

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tamil samaj festival

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भोपाल. तमिल समाज के श्रद्धालुओं द्वारा बुधवार को निकाली गई माता मारिअम्मन की रथयात्रा में श्रद्धा भक्ति के साथ-साथ कठिन तप का नजारा भी दिखाई दिया। रथयात्रा में आगे आगे पानी का टैंकर यात्रा पर पानी की बौछार कर रहा था। माता मारिअम्मन के रथ की रस्सी को पीठ में हुक के सहारे अटकाकर श्रद्धालु रथ खीच रहे थे। पीले परिधानों में महिलाएं जीभ और गाल के आरपार त्रिशुल निकालकर चल रही थी, तो कुछ भक्त कीलों की चप्पल पहनकर रथ को खीच रहे थे। तमिल समाज की ओर से माता मारिअम्मन की आठ दिवसीय आराधना के समापन मौके पर बुधवार को रथयात्रा निकाली गई।

यह रथयात्रा शिवाजी नगर पांच नंबर स्थित हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे। ढोल, ढमाकों और बैंड पर श्रद्धालु थिरक रहे थे, और माता के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। अनेक महिलाएं सिर पर कलश लिए हुए शामिल थी। इस रथयात्रा के आगे आगे पानी का टैंकर सडक़ पर पानी का छिडक़ाव करते हुए चल रहा था। पांच नंबर से शुरू हुई यह रथयात्रा नर्मदा भवन, तुलसी नगर, सेंट मेरी स्कूल, अंबेडकर जयंती मैदान के सामने से होते हुए मद्रासी कॉलोनी पहुंची। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मन्नत पूरी होने पर करते हैं कठिन तप

तमिल समाज की ओर से साल में एक बार यह शोभायात्रा बैसाख माह में निकाली जाती है। श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर मां भगवती अर्थात माता मारिअम्मन की शोभायात्रा निकालते हैं। तमिल समाज के मारिअप्पा ने बताया कि श्रद्धालु जब कोई मन्नत मांगते हैं और वह पूरी हो जाती है, तो मां की आराधना की जाती है। आठ दिन तक कठिन व्रत रखकर श्रद्धालु आराधना करते हैं। इसी के तहत आठ दिवसीय आराधना का समापन बुधवार को हुआ, इसी के तहत यह रथयात्रा निकाली गई।