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डेढ़ लाख टीचर्स की रुकेगी ‘वेतन वृद्धि’, जा सकती है ‘नौकरी’ ! TET बना कारण

MP News: 5 साल में यह दूसरा मौका है जब टेस्ट न देने पर शिक्षकों के नौकरी जाने का खतरा है।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: शिक्षक दिवस से पहले सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से शिक्षक तनाव में आ गए हैं। उनकी नौकरी खतरे में है। ये वे शिक्षक हैं जो टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) उत्तीर्ण किए बिना नौकरी कर रहे हैं। प्रदेश के करीब एक लाख शिक्षक इस दायरे में हैं। इसमें नियमित से लेकर अतिथि शिक्षक दोनों शामिल हैं।

5 साल में यह दूसरा मौका है जब टेस्ट न देने पर शिक्षकों के नौकरी जाने का खतरा है। इससे पहले 9 शिक्षकों को रिटायमेंट दिया जा चुका है। राजधानी सहित प्रदेश में चार लाख शिक्षक हैं। इनके पास डीएड से लेकर बीएड तक योग्यता है। इनमे से ज्यादातर टीइटी उत्तीर्ण हैं। लेकिन पूर्व में भर्ती शिक्षकों पर इसका असर होगा।

इस टेस्ट के अभाव में शिक्षकों की नौकरी जाने से लेकर इंक्रीमेंट तक रुकेगा। शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनके मुताबिक विभाग के नियमों के आधार पर भर्ती हुई थी। अगर कोई बिना टेस्ट नौकरी कर रहा है तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार है। शिक्षकों की बजाय अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

35 हजार प्राइवेट स्कूल में डेढ़ लाख शिक्षक

अगर प्राइवेट स्कूलों में सख्ती हुई तो सबसे ज्यादा शिक्षक यहां के नौकरी गंवाएंगे। छोटे-बड़े मिलाकर प्रदेश में 35 हजार प्राइवेट स्कूल हैं। शिक्षकों की अनुमानित संख्या यहां डेढ़ लाख है। अधिकांश टीटीई क्वालिफाइड नहीं हैं। यहां भर्ती की प्रक्रिया स्कूल स्तर पर होती है।

पांच साल पहले हो चुका है टेस्ट, 33 फीसदी हुए थे फेल

स्कूल शिक्षा विभाग पहले भी भोपाल में टेस्ट करा चुका है। जिसमें 1300 शिक्षक फेल हो गए थे। परीक्षा में 5891 शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। ये वे शिक्षक थे जिनके स्कूल का रिजल्ट कमजोर था। परीक्षा रिजल्ट के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इसमें 16 शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। फैसला 20:50 के फॉर्मूले यानी 20 साल की नौकरी या 50 साल की उम्र के तहत लिया गया है।

सरकारी स्कूलों में जो शिक्षक कार्यरत हैं उनकी नियुक्ति विभाग के नियमों के तहत हुई। इन नियमों के आधार पर जो योग्यता दी गई वह वे पूरी कर रहे हैं। ऐसे में जो शिक्षक टीईटी नहीं है, लेकिन उनके नौकरी से बाहर करने की बात आती है तो अधिकारी जिम्मेदार हैं।- उपेन्द्र कौशल, अध्यक्ष मप्र शिक्षक संगठन

प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती से पहले पात्रता परीक्षा हो रही है। लंबे समय से प्रक्रिया है। ऐसे में बिना टेस्ट के शिक्षकों की संख्या कम है। हालांकि अभी विभाग के निर्देश आना बाकी है। निर्देश आने के बाद संख्या का निर्धारण हो सकेगा।- नरेन्द्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी