
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में प्रभार सौंपने का खुल्लमखुल्ला खेल चल रहा है। न कोई नियम और न ही कोई कायदे जिस पर मन आ गया उसी को प्रभार सौंप दिया। हालही में विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया पर आरोप है की कि कार्यपालन यंत्री अलोक अग्रवाल पर इतनी मेहरबानी दिखाई कि 37 लोगों की वरिष्ठता को दरकिनार कर उन्होंने 38वें नंबर पर मौजूद अग्रवाल को अधीक्षण यंत्री का प्रभार सौंप दिया। विभाग के विशेषज्ञों का इस बारे में कहना है कि 38वें नंबर के अधिकारी में ऐसी क्या खासियत है जो अन्य 37 वरिष्ट लोगों की वरिष्टता को अनदेखा कर दिया गया। साथ ही ये भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया किसी राजनैतिक और प्रशासनिक दबाव में ऐसे फैसले ले रहे हैं। वहीं सूत्रों से ये भी पता चला है कि ग्वालियर और सागर जिले में भी प्रभार सौंपने के नाम पर वरिष्टता का कोई ध्यान नहीं रखा गया। दोनों ही जगहों पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री अत्यंत कनिष्ठ है।
प्रभार सौंपने के नाम पर खुल्लमखुल्ला मनमानी
प्रभार सौंपने के मामले में मनमानी का आलम ये है कि न तो वरिष्ठता का ध्यान दिया जा रहा और न ही कनिष्ठता का जैसी साहब की मर्जी होगी वैसी ही जिम्मेदारी मनचाहे अधिकारी को दे दी जाएगी। बता दें जहा एक ओर प्रदेश में पदोन्नती पर रोक लगी हुई है। तो वहीं दूसरी तरफ विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता वरिष्टता की अनदेखी कर वरिष्ठ पदों के प्रभार कनिष्ठ अधिकारियों को सौंप रहे हैं। सहायक यंत्री का प्रभार हो, कार्यपाल यंत्री का प्रभार हो, अधीक्षण यंत्री का प्रभार या फिर मुख्य अभियंता का प्रभार सभी पदों पर वरिष्टता की अनदेखी की जा रही है।
52 में से 37 जिलों में दोहरी भूमिका
प्रदेश में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 52 जिलों में से 37 जिलों में प्रभारी कार्यपालन यंत्री कार्य कर रहे हैं। जैसे रीवा कार्यपालन यंत्री आर के सिंह को अधीक्षण यंत्री रीवा मंडल का प्रभारी है। अरूण श्रीवास्तव कार्यपालन यंत्री बालाघाट को अधीक्षण यंत्री छिंदवाड़ा का भी प्रभारी है। महेंद्र सिंह कार्यपालन यंत्री पन्ना को अधीक्षण यंत्री पन्ना मंडल का भी प्रभार है। लिहाजा सवाल ये उठता है कि क्या विभाग में योग्य अफसरों का टोटा है जो 37 जिलों में अधिकारी दोहरी भूमिका निभा रहे हैं।
केके सोनगरिया के बयान में विरोधाभास
केके सोनगरिया ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि 37 लोगों की वरिष्ठता पूरे प्रदेशभर में है। इसलिए मुख्यालय में जो योग्य अधिकारी है उसे जिम्मेदारी दी गयी। जबकि जानकारी जुटाने पर पता चला कि प्रमुख अभियंता कार्यालय में ही अत्यंत वरिष्ठ कार्यापालन यंत्री दिलीप जैन, संतराम कुलस्से, नन्हेलाल टांडेकर और संजय दुबे पदस्थ हैं। जो आलोक अग्रवाल से लगभग 8 से 10 साल वरिष्ठ हैं। अब सवाल उठता है कि अगर सोनगरिया की नजर में सिर्फ अलोक अग्रवाल ही योग्य अधिकारी हैं तो उपरोक्त अभियंताओं को शासन की नीति के अनुसार इनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव शासन को भेजा जाना चाहिए।
अंदरखाने सोनगरिया के खिलाफ अधिकारी हो रहे लामबंद
वरिष्ठ होने के बावजूद अनदेखी की मार झेल रहे अधिकारियों के अंदर असंतोष फैल रहा है। नाम न छापने के आग्रह पर कुछ अधिकारियों ने कहा कि प्रभारी प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया की खुली मनमानी चल रही है। ज्यादा दिन तक ऐसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। जरूरत पड़ी तो खुल कर मोर्चा खोलेंगे।
केके सोनगरिया ने दिया ये तर्क
काम की आवश्यकता एवं रिक्त पदों को देखते हुए उन्हें कार्यालय में अस्थायी रूप से आगामी निर्देश तक प्रभार दिया है। जो अच्छा काम करता है तो उससे काम करवाया जाता है। प्रशासनिक और राजनैतिक दबाव जैसी कोई बात ही नहीं है।
केके सोनगरिया, प्रभारी प्रमुख अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
Published on:
13 Oct 2022 09:02 pm
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