
82 साल के जेपी पांडे ने बताई अंग्रेजों के अत्याचार की कहानी
सागर। आजादी के आंदोलन का पहला पाठ मैंने अपने बड़े भाई से सीखा। उस समय मैं सात साल का था। बड़े भाई आंदोलन में शामिल थे और मैं उनके साथ मीटिंगों में जाता था। मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी, पर समझ आने लगा था कि कोई बड़ा काम हो रहा है। मह बच्चों के साथ गांव की गलियों में अंग्रेजो भारत छोड़ो के नारे लगाते घूमते थे। गांव-गांव में आजादी की अलख जागने लगी थी। कांग्रेस के कई बड़े नेता मीटिंगों के लिए गांव-गांव आते थे। अंग्रेज दमन पर उतर आए थे। आंदोलन से जुड़े लोगों पर लाठी चार्ज, जेल भेजना और यातनाएं देना आम बात थी। जीवन के 82 साल पूरे कर चुके जेपी पांडे परतंत्र और स्वतंत्र भारत के कई किस्से अपनी यादों में संजोय हुए हैं। पांडे बताते हैं कि हमारे गांव में एक आम का बगीचा था। बगीचे में तीन-चार सौ पेड़ हुआ करते थे। उस समय बगीचे में चीलें और चमदागड़ बहुत थीं। अंगे्रज वहां शिकार करने आते थे। वह इनका शिकार कर ले जाते थे। इनका डर ऐसा था कि जब यह आते थे तो बच्चे घर से बाहर नहीं निकलते थे। अंग्रेजों के अत्याचार के कारण बड़े भाई ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और आंदोलन में शामिल हो गए।
जब अंग्रेज अफसर ने सागर बुलाया :
हमारे पिताजी कुआं खोद रहे थे। एक बार हमारे गांव से अंग्रेज अफसर और उसका परिवार निकला, पत्नी बच्चे साथ थे। वह चलकर कुएं के पास आया और पिताजी से बात की। पिताजी ने बताया कि पानी और सिंचाई के लिए कुआं खोदा जा रहा है तो वह बोला आप सागर आएं आर्थिक मदद देंगे। जब पिताजी उनसे मिलने पहुंचे तो सुरक्षा गार्डों ने मिलने नहीं दिया। पिताजी बहुत नाराज हुए और हल्ला किया। जब यह बात अफसर को पता चली तो उसने मिलने बुलाया।
भ्रष्टाचार बड़ी समस्या :
देश आजाद हुआ तो पढ़ाई पर जोर दिया गया। स्कूलों में व्यायाम शालाएं खोली गई। नई पीढ़ी ने विकास में भागीदारी निभाई। आजाद भारत में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार पनपना रहा। जो विकास होना था वह भ्रष्टाचार के कारण नहीं हो पाया। देश को विकसित बनाना है तो इससे भ्रष्टाचार मिटाना होगा।
Published on:
10 Aug 2022 12:00 am
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