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Film Review : जिंदगी को जीतने के जिंदा रहना बहुत जरूरी है

patrika.com के रीडर्स के लिए न्यूरोसाइकेट्रिस्ट डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने किया द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी फिल्म का रिव्यू

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भोपाल

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Vikas Verma

Nov 23, 2018

The Dark Side Of Life: Mumbai City

The Dark Side Of Life: Mumbai City

पत्रिका डॉट कॉम रेटिंग : 3.5 स्टार
निर्देशक : तारिक खान
कलाकार : महेश भट्ट, अवी, केके मेनन, रेखा खान, निखिल रत्नपारखिल

भोपाल। जाने-माने फिल्ममेकर महेश भट्ट के एक्टिंग करियर की पहली फिल्म 'द डार्क साइड ऑफ लाइफ मुंबई सिटी' शुक्रवार को रिलीज हुई। इस फिल्म के जरिए भोपाल को अवी भी एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं। यह पहली ऐसी फिल्म है जो मेंटल हेल्थ की बात करती है। पत्रिका ने एक प्रयोग करते हुए शहर के चर्चित कंसलटेंट न्यूरोसाइकेट्रिस्ट डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी को फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया। फिल्म देखने के बाद डॉ. त्रिवेदी ने पत्रिका प्लस के रीडर्स के लिए फिल्म रिव्यू किया। डॉ. त्रिवेदी बताते हैं कि यह फिल्म उन सभी सामाजिक पहलू और मानसिकता को दिखाते हैं जो मेंटल हेल्थ को खराब करने की कोशिश करते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि हर इंसान को समय बदलने का इंतजार करना चाहिए। हम खुद के ही सबसे बड़े दुश्मन हैं, धीरज रखे तो चीजें ठीक हो जाती हैं। हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए जिंदा रहना बहुत जरूरी है।

जिस तरह फिल्म प्रमोशन के दौरान आत्महत्या को ग्लोरीफाई किया गया वो फिल्म में नजर नहीं आता है जोकि मेंटल हेल्थ के प्वाइंट ऑफ व्यू से अच्छी बात है। फिल्म में ब'चों के यौन शोषण से प्रभावित होती मानसिकता, पेरेंट्स के एम्प्टीनेस्ट सिंड्रोम, डिप्रेशन, नशे की लत को भी अच्छे से दिखाया गया है। अवी की एक्टिंग अच्छी है, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को इमोंशंस के जरिए बखूबी दिखाया है। बस इस फिल्म की रफ्तार दर्शकों को थोड़ा बोर कर सकती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो हर बड़े शहर में स्ट्रगल करने वाले व्यक्ति को देखनी चाहिए। इस फिल्म के माध्यम से उन्हें ये भी पता चल जाएगा कि मुंबई में अगर उन्हें अपने लिए जगह बनानी है तो वो किस तरह की दिक्क्तों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कहानी : फिल्म की कहानी में कई कहानियां हैं, अवी बॉलीवुड में काम की तलाश कर रहे एक सिंगर और मॉडल्स के किरदार में हैं। केके मेनन एक शेयर ब्रोकर के किरदार में हैं तो निखिल अपनी पत्नी के साथ किराएदार के तौर पर एक घर में रहते हैं। उनकी पत्नी रिसेप्सनिस्ट हैं, वहीं एक पुलिसवाला भी है जो अपनी पत्नी को खुश रख पाने में नाकाम है और एक कपल जो टेररिस्ट बनकर मुंबई में घुस आया है। स्टोरी आगे बढ़ती है तो किसी को काम नहीं मिलता तो किसी का बसा बसाया घर उजड़ जाता है, ऐसे में ये सभी खुदकुशी का मन बना लेते हैं लेकिन क्या ये सच में मौत को गले लगाते हैं या फिर जिंदगी को, ये देखने के लिए आपको मूवी देखनी होगी।

एक्टिंग एंड म्यूजिक : इस फिल्म में सेंटर ऑफ अट्रैक्शन महेश भट्ट हैं, जैसा लोग अक्सर उन्हें टीवी पर देखा करते हैं उनका वैसा ही सहज और सधा हुआ अंदाज फिल्म में देखने को भी मिला है। फिल्म का संगीत ऐसा है और अगर इन गानों को आप अकेले में बैठकर सुनेंगे तो ये आपके जेहन में बस जाएंगे। जुबिन नौटियाल का आवारगी और फिल्म के दूसरे गाने भी दिल को छू जाने वाले हैं।