
बड़े तालाब में भू-माफियाओं ने बसा दी कॉलोनियां-मैरिज गार्डन और होटल, फिर भी प्रशासन की सूची में शामिल नहीं, कैसे हटेंगे कब्जे
भोपाल. राजधानी की लाइफलाइन बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में किए गए बड़े-बड़े अवैध निर्मार्णों से इसका दायरा लगातार सिकुड़ रहा है। सर्वे में अवैध निर्माण चिह्नित करने के बावजूद प्रशासन इन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं कर रहा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शहर में भू-माफियाओं की बनाई जा रही सूची में बड़े तालाब के अपराधी शामिल नहीं हैं। इसके उलट अवैध निमार्णों को बचाने के लिए गलियारा तलाशने की कवायद की जा रही है। हालात ये हैं कि खानूगांव से वीआईपी रोड तक तालाब के अंदर रिटेनिंग वॉल बनाकर 40 बड़े प्लॉटों को अभयदान दे दिया गया। इससे ये प्लॉट कैचमेंट के दायरे से बाहर कर दिए गए। विरोध होने पर वर्ष 2016 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दीवार तोडऩे के निर्देश दिए थे, पर न तो उस समय और न ही अब कोई कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन और नगर निगम के दावों के उलट तालाब किनारे खानूगांव, बैरागढ़ क्षेत्र में कब्जों की संख्या बढ़कर 361 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद सरकारी महकमे कागजी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर रहे हैं। नीलबड़-रातीबड़ की ओर तालाब किनारे किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद रसूखदारों ने बड़े पैमाने पर प्लॉट काट दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तालाब किनारे अवैध कब्जे बढऩे से इसकी जल संग्रहण क्षमता कम हुई है, साथ ही जलीय जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
खानूगांव बना अतिक्रमण का मुख्य केंद्र
मास्टर प्लान-2005 में खानूगांव के एक छोटे से हिस्से को आवासीय किया गया था। इसी की आड़ में यहां बड़े पैमाने पर कब्जे किए गए। अतिक्रमणकारियों ने यहां मैरिज गार्डन तक तान दिए। इनसे निकने वाला सीवेज का पानी बड़े तालाब में छोड़ा जा रहा है। प्रशासन की अनदेखी से यहां बड़े फार्म हाउस बना दिए गए हैं। खानूगांव और बैरागढ़ क्षेत्र में ही 361 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए थे, पर कार्रवाई सिर्फ 20 पर ही की गई।
बोट क्लब में तालाब के अंदर खड़े किए पिलर
बोट क्लब की ओर नगर निगम ने वाटिका पार्क में एक हजार वर्गफीट में सीमेंट-कॉन्क्रीट का बड़ा निर्माण किया है। यह निर्माण वाटर स्क्रीन और थियेटर के रूप में किया गया। हैरत वाली बात है कि इस थियेटर के लिए बनाई गई बिल्डिंग के पिलर तालाब के अंदर खड़े किए गए हैं। रामसर साइट होने के नाते तालाब के अंदर किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है। ये तालाब की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
सैर-सपाटा निजी हाथों में सौंपने की तैयारी
प्रेमपुरा घाट के पास मप्र पर्यटन विकास निगम के पास एफटीएल से सटा हुआ क्षेत्र है। यहां करीब 22 एकड़ में सैर सपाटा विकसित किया गया था। अब इसे 30 साल के लिए निजी एजेंसी को देने की कवायद की जा रही है। इसके विरोध में सैर-सपाटा कर्मचारी लामबंद हुए हैं। आरोप है कि सैर-सपाटा को निजी हाथों में सौंपने की आड़ में तालाब किनारे लगी निजी जमीन मालिकों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इन जमीनों पर मैरिज गार्डन आदि संचालित किए जाएंगे और यहां तक पहुंचने के लिए एप्रोच रोड सैर-सपाटा से दी जाएगी। इससे तालाब किनारे मानवीय गतिविधियां बढ़ेगी, जिससे तालाब की सेहत को और नुकसान पहुंचेगा।
मत्स्य विभाग की जमीन पर होटल
भदभदा रोड की ओर तालाब किनारे निजी एजेंसी को होटल बनाने के लिए मत्स्य विभाग ने जमीन लीज पर दी है। इसके पूर्व भी वन विहार से भदभदा के बीच दो बड़ी होटल बन चुकी हैं। लेक व्यू का फायदा उठाने के लिए तालाब की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थिति ये है कि जिस जगह होटल तामीर की जा रही है, उसका मुख्य द्वार बफर जोन में आ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक तालाब किनारे निर्माण किए जाने से बायोडायवर्सिटी बुरी तरह प्रभावित होगी।
कैचमेंट में संचालित हो रहा अस्पताल
भोपाल-इंदौर हाईवे पर भैंसाखेड़ी के पास निजी अस्पताल संचालित हो रहा है। इसका बड़ा हिस्सा कैचमेंट है। इस साल किए गए सर्वे के दौरान इस क्षेत्र में एक से 17 नंबर की मुनारें यहां नहीं मिलीं। बीच-बीच में कुछ मुनारें पानी में डूबी हुई थीं। चार साल में तालाब के एफटीएल को तय करनेके लिए मुनारों की गिनती की गई, लेकिन तालाब के कैचमेंट में किए गए निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई।
तालाब किनारे काट दी कॉलोनियां
बड़े तालाब किनारे सूरज नगर, नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा की ओर कैचमेंट में निर्माण की अनुमति जारी नहीं की जातीं। इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों से मिलीभगत कर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा दिया गया है। मौजूदा समय में यहां सौ से अधिक कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। हालात ये हैं कि इन पर कार्रवाई करने के बजाय इस पूरे क्षेत्र को प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में आवासीय करने एवं कैचमेंट से मुक्त करने की कवायद की जा रही है। आसपास के किसान भी इस क्षेत्र को कैचमेंट से मुक्त करने की मांग उठाते रहे हैं।
किसी तरह का समौता नहीं किया जाएगा
बड़े तालाब को संरक्षित करने के लिए नगर निगम आसपास के अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करता है। कई बार बाधाएं आती हैं। तालाब के संरक्षण के लिए किसी तरह का समौता नहीं किया जाएगा।
आलोक शर्मा, महापौर
बड़े तालाब से कब्जे हटाने के लिए निर्देश दिए हैं। कार्रवाई भी की जा रही है। राजस्व नक्शे में तालाब की सीमा चिह्नित की गई है। इस कवायद से यहां किए गए कब्जे खुद ब खुद सामने आ जाएंगे।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर
Updated on:
16 Dec 2019 11:28 am
Published on:
15 Dec 2019 08:10 pm
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