
लीगल एड क्लिनिक से ही नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में पशुओं की बलि पर रोक लगी थी
भोपाल। नेपाल ने कानूनी सहायता को वैधानिक दर्जा दिया है और इसकी निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है। यह कहना है नेपाल के सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नेपाल अनिल कुमार सिन्हा का। वे कोलार डेम स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआइयू) में दो दिन से चल रहे लीगल एड क्लिनिक वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम के समापन में बतौर मुख्यअतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर बताया कि नेपाल में लीगल एड क्लीनिकों की मदद से ही हम लोगों को पशु बलिदान के लिए जागरूक कर पाए। जिसका परिणाम यह रहा कि नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में दी जाने वाली लाखों पशुओं की बलि पर रोक लगी। इस मंदिर में हर पांचवें साल में होने वाली पूजा में लाखों पशुओं की बलि दी जाती थी।
उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा पशुबलि मेला था। इस मौके पर उन्होंने बताया कि कानूनी जागरुकता और शिक्षा का प्रसार करने के लिए, कानून कॉलेजों में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि हुई है। नेपाल की सर्वोच्च अदालत इतनी जीवंत थी कि उसने तत्कालीन राजा द्वारा पारित एक आदेश को असंवैधानिक ठहरा दिया, जब वहां राजशाही शासन मौजूद था। इस मौके पर मेडिएशन (मध्यस्थता) के विषय में ट्रेनिंग दी गई। इस विषय पर उन्होंने भारत में मध्यस्थता की अवधारणा को मजबूत करने के लिए, उत्तरांचल का उदाहरण दिया। जिसमें मुकदमेबाजी की प्रक्रिया के माध्यम से मुकदमेबाजी में लगभग 20 वर्षों तक चलने वाले एक मामले को आसानी से हल किया गया था। उन्होंने कहा कि कानूनी पाठ्यक्रमों वाले भारतीय विश्वविद्यालयों ने हमेशा नेपाली मूल के छात्रों को भारत में कानून बनाने और फिर नेपाल में अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मध्यस्थता सबसे अच्छी संकल्प पद्धति है
इस मौके पर न्यायमूर्ति लोकायुक्त मध्यप्रदेश एनके गुप्ता ने कहा कि मध्यस्थता सबसे अच्छी संकल्प पद्धति है जो हमारे पास है। मध्यस्थता सस्ती, गोपनीय, शीघ्र और जीत की स्थिति दर्शाती है। हमारे देश के लोगों को कभी-कभी मध्यस्थता का एहसास तब होता है। जब वे मुकदमेबाजी में सफलता पाने में असफल रहते हैं।
Published on:
18 Feb 2019 04:58 pm
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