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लोगों के मुंह से मिटा बांग्ला पान का जायका

फसल सडऩे से 100 करोड़ का नुकसान डेढ़ महीने से बंद हैं पान की गुमठियां    

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भोपाल

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Arun Tiwari

May 03, 2020

लोगों के मुंह से मिटा बांग्ला पान का जायका

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भोपाल : कोरोना के लंबे लॉकडाउन के चलते लोगों के मुंह से पान का जायका मिट गया है। यहां के लोग बांग्ला, मीठी पत्ती और कर्पूरी पान के शौकीन माने जाते हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा बांग्ला पान की पैदावार होती है। यहां बांग्ला पान तो बांग्लादेश और पाकिस्तान भी जाता है। इसके अलावा प्रदेश के देशी और कटक पान की भी अन्य प्रदेशों में मांग होती है। राजधानी भोपाल तो खासतौर पर पान के शौकीनों के नाम से ही जानी जाती है। प्रदेश में पान की फसल के सडऩे से करीब 100 करोड़ के कारोबार का नुकसान हुआ है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर पान का कारोबार होता है। यहां पर लाखों लोग पान की खेती से जुड़े हुए हैं। ये लोग अब दो जून की रोटी को मोहताज हो गए हैं।

प्रदेश में पान की फसल साल में एक बार होती है और इसको मार्च-अप्रैल के महीने में तोड़ा जाता है। पान तोडऩे के बाद ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह तक चलता है,उसके बाद खराब हो जाता है। लॉकडाउन के चलते दुकानें और परिवहन बंद होने से पान की 90 फीसदी फसल सड़ गई है। लोगों ने पान तोड़कर फेंक दिए हैं। प्रदेश में 19 जिलों में सबसे ज्यादा पान के बरेजे लगाए जाते हैं।

इन जिलों में होती है पान की खेती :
छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, रीवा, सतना, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, दमोह, सागर, रायसेन, होशंगाबाद, नीमच, मंदसौर, रतलाम, देवास, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर

प्रदेश में इतने पान कारोबारी प्रभावित :
- 80 हजार गुमठी
- 20 हजार फुटकर व्यापारी
- 5 हजार थोक व्यापारी
- 20 हजार पान के बरेजे लगाने वाले किसान

यहां जाते हैँ मध्यप्रदेश के पान :
प्रदेश के पान देश ही नहीं विदेशों में भी मशहूर हैं। प्रदेश का सोहागपुरी बांग्ला सबसे ज्यादा प्रदेश से बाहर जाता है। इसके अलावा यहां देशी और कटक पानी भी होते हैं। प्रदेश के पान उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और मुंबई जाते हैं। देश से बाहर पाकिस्तान और बांग्लादेश में इनकी ज्यादा मांग होती है।

पान का धार्मिक महत्व :
पान खाकर मुंह की शान बढ़ाने के अलावा हिंदू धर्म में पान का धार्मिक महत्व भी माना जाता है। हर पूजा और शुभ कार्य में पान का विशेष महत्व है। पान का आयुर्वेदिक तेल भी बनाया जाता है। इसके अलावा आयुर्वेद में पान को कई बार औषधी के रुप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

महंगी होती है पान की लागत :
पान-किसान व्यापारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बसंत चौरसिया कहते हैँ कि पानी की फसल की लागत बहुत अधिक होती है। एक किसान पान की 15-20 पारी पान लगाता है। 200 फीट की एक पारी होती है। एक पारी में 8-10 हजार रुपए की लागत आती है। जिसमें खाद,बीज, पानी और मजदूर शामिल होते हैं। यानी एक किसान के यहां पान उगाने में 2 लाख रुपए तक की लागत आती है। पान का किसान साल में एक ही फसल ले पाता है। इसके अलावा उसका कोई दूसरा कमाई का साधन नहीं है। बसंत गुप्ता ने कहा कि सरकार उनके नुकसान की भरपाई करे तभी वे अपना परिवार पाल सकेंगे। पाबंदी के बाद भी गुटखा-पाउच बाजार में बिक रहे हैं,सरकार इन पर पूर्ण रुप से पाबंदी लगाए।

पनवाड़ी में कैद हो गया मालवा का पान :
मंदसौर जिले की भानपुरा नगर के लोगों में रोजी-रोटी का संकट आ गया है। तंबोली समाज के अध्यक्ष यशवंत रुद्रवाल और पान किसान लेखराज मंडकरिया ने बताया कि पान किसानों ने फरवरी- मार्च में नई पनवाड़ी तैयार कर पान की कलम लगाई। पान की बेल निकलना शुरू हो चुकी है जिससे बाहर से लाई गई नई मिट्टी डाली जाना आवश्यक है लेकिन लॉकडाउन के चलते पान किसानों को मिट्टी भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उत्तर प्रदेश में पान मंडी खुली होने से पड़ोसी जिले नीमच के कुकड़ेश्वर और पड़दा के पान किसान मंडियों तक पान भिजवा रहा है लेकिन भानपुरा के लोग अपनी आंखों से पान सड़ते हुए देख रहे हैं।

पान बरेजों में कोरोना वायरस का असर
सतना जिले के 200 पान बरेजों में ताला लग गया है। पान उत्पादक किसान विक्की चौरसिया बताते हैं कि मैहर स्थित पान मंडी में रोजाना एक लाख से अधिक का कारोबार होता था, लेकिन मंडी में सन्नाटा पसरा है। पन्ना जिले के राजकुमार चौरसिया ने बताया कि कई लोगों ने कर्ज लेकर पान की खेती की थी, अब पान बिक नहीं रहा है। फसल खराब हो रही है। ऐसे हालात में किसान कर्ज कैसे चुकाएंगे। पन्ना के राजकुमार चौरसिया ने बताया कि कई लोगों ने कर्ज लेकर पान की खेती की थी, ऐसे हालात में किसान कर्ज कैसे चुकाएंगे। रीवा जिलेे में 500 से अधिक पान के बरेज हैं। यहां बांग्ला,कर्पूरी पानी की बड़े स्तर पर खेती होती है। खजुहा निवासी कृषक परमसुख चौरसिया बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण प्रतिदिन लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। महसांव के पान किसान निलेश चौरसिया बताते हैं कि नुकसान के कारण धीरे-धीरे लोग पान की खेती बंद कर अन्य व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं।

कांग्रेस ने की मुआवजे की मांग :
कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि उत्तरप्रदेश और बिहार में पान का कारोबार चालू है, इसलिए मध्यप्रदेश में भी इस कारोबार पर से रोक हटाना चाहिए। फूल,फल,सब्जी की तरह इनके नुकसान पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा है कि पान कारोबारियों के नुकसान का आंकलन का इसकी भरपाई करनी चाहिए। साथ ही इनको तीन माह का मुफ्त राशन और 7500 रुपए प्रतिमाह की राहत राशि देनी चाहिए।