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लेखक का धर्म है कि वह कष्ट सहकर भी समाज के लिए लिखे

हिंदी लेखिका संघ का सम्मान समारोह, श्रीकृष्ण सरल जन्मशती समारोह में पुरस्कृत हुईं लेखिकाएं

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लेखक का धर्म है कि वह कष्ट सहकर भी समाज के लिए लिखे

भोपाल। हिन्दी लेखिका संघ का 24 वां वार्षिक पुरस्कार व सम्मान समारोह मानस भवन के रामकिंकर सभागृह में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुधा तेलंग ने की। वहीं, मुख्य अतिथि के रुप में प्रसिद्ध कहानीकार मुकेश वर्मा तथा विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा मौजूद थे। मुकेश वर्मा ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए। हिंदी में पाठकों की कमी नहीं है, उन तक किताबें नहीं पहुंच पा रही हैं। वहीं, धर्मेन्द्र शर्मा ने कहा कि लेखक का धर्म है कि कष्ट झेले और समाज के लिए लिखते जाए।

वहीं, सुधा तेलंग ने कहा कि आज महिलाएं अभिव्यक्ति के लिए स्वतंत्र हैं और कर्मठ होकर कार्य कर रही हैं। आज के समय में महिलाओं को संगठित होकर काम करने की महती आवश्यकता है। संघ की अध्यक्ष अनीता सक्सेना ने कहा कि साहित्यकार कलम के सिपाही हैं और वह लेखनी रूपी तलवार से देश की विरोधी ताकतों को जवाब देंगे। इस अवसर पर लेखिका संघ की वार्षिक पत्रिका 'सर्जना' का विमोचन किया गया। वीर रस के ओजस्वी कवि श्री कृष्ण सरल की जन्म शताब्दी पर उनको समर्पित की गई। लेखिका संघ की द्वारा संपादित बाल पुस्तक 'बाल पल्लव', डॉ. कुमकुम गुप्ता, डॉ. माया दुबे, डॉ. विनीता राहुरीकर की पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन शशि बसंल ने, वार्षिक प्रतिवेदन डॉ. कुमकुम गुप्ता ने और आभार प्रदर्शन उषा जायसवाल ने माना।

इनका हुआ सम्मान
लेखिका संघ के प्रतिष्ठित सम्मान भोपाल की सुनीता गजबे को, कांति शुक्ल 'उर्मि' को और आशा सक्सेना को प्रदान किया गया है। अन्य सम्मान डॉ. प्रीति प्रवीण खरे, विनय पंवार(नई दिल्ली), राधारानी चौहान 'मानवी', ज्योति जैन (इंदौर), स्व. दीप्ति शर्मा, डॉ. पुष्पलता (मुजफ्फरनगर), दीप्ति मित्तल (पुणे), अनामिका तिवारी (जबलपुर), शोभा शर्मा, रेखा दुबे(विदिशा), दामिनी खरे, डॉ. वर्षा चौबे, नीना सिंह सोलंकी, सरोज गुप्ता (सागर), डॉ. सुमन चौरे, डॉ. मीनाक्षी जोशी (पुणे), मधु सक्सेना (रायपुर), छाया त्रिपाठी ओझा (फतेहपुर), शकुंतला संज्ञा (ललितपुर), अपूर्वा चतुर्वेदी, सिमरन शिवनारायण को प्रदान किया गया है।