8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

समाज में व्यक्ति ने व्यक्तिगत लाभ के लिए सीमाएं खींच दी हैं

शहीद भवन में नाटक 'पंचवटी' का मंचन तो भारत भवन में नाटक 'सीमा पार' का मंचन

2 min read
Google source verification
drama in shaheed bhawan

भोपाल। शहीद भवन में तीन दिवसीय फुलकारी नाट्य उत्सव के अंतिम दिन नाटक 'पंचवटी' का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन हरीश शर्मा ने किया। एक घंटे के नाटक में 25 कलाकारों ने ऑनस्टेज अभिनय किया है। नाटक की कहानी मैथिलीशरण गुप्त के खंडकाव्य 'पंचवटी' पर आधारित है। इसमें मानव-जीवन की सभी अवस्थाओं और परिस्थितियों का वर्णन किया गया है। नाटक एक ही समय में मनुष्य के अनेक चरित्रों पर कटाक्ष करता है।

नाटक में मानव-जीवन के चारों चरित्रों को खूबसूरत ढंग से दर्शाया गया। एक और लक्ष्मण जैसे भ्रातृ-प्रेमी हैं जो भाई की सेवा के लिए अयोध्या का राज वैभव छोड़कर अपने बड़े भाई राम के साथ वन गमन करते हैं, वहीं दूसरी और सूपर्नखा जैसी स्त्री है जो वासनाओं के वशीभूत होकर लक्ष्मण के सामने प्रेम प्रस्ताव रखती है, लेकिन लक्ष्मण के अस्वीकार करने पर वह राम को वरण करना चाहती है। वहीं एक ओर राम हैं जो सूपर्नखा को छोटे भाई की प्रेमिका समझकर उसके प्रेम-प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं और मर्यादा का एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

समाज में व्यक्ति ने व्यक्तिगत लाभ के लिए सीमाएं खींच दी हैं

भोपाल। भारत भवन में 'गुरुवार को नाटक 'सीमा पार' का मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन प्रीति झा तिवारी ने किया। नाटक में कलाकारों ने जीवन की बदलती स्थितियों, अनुभव और जीवन-मौत के संघर्ष को समझाया। उन्होंने अभिनय के माध्यम से उस पल को जीवंत बनाया जब लेखक भारतेंदु का साक्षात्कार मौत से होता है। डायरेक्टर ने बताया कि नाटक ये सवाल उठाता है कि वो सीमाएं कौन सी हैं, जमीन पर खिंची रेखा या वो सीमा है जिसे समाज के धर्म के नाम पर व्यक्ति ने व्यक्ति के लिए बनाया है या व्यक्तिगत लाभ के लिए खींचा है।

नाटक में पहला सीन गंगा आरती का था। वहां गंगा के तट पर नाटक मंडली नाट्य समारोह की रिहर्सल करती है। अगले सीन में भारतेंदु और मृत्यु आपस में बात करते दिखाई दिए। इस दौरान भारतेंदु, मृत्यु से कहते हैं कि तुम मेरे साथ खेल खेलो अगर तुम जीत गईं तो मैं तुम्हारे साथ चलूंगा। अगले सीन में नाट्य मंडली के लोग आपस में बातचीत करते हैं कि भारतेंदु की तबीयत बहुत खराब है, अब किस तरह नाट्य उत्सव पूरा हो सकेगा। मंच पर साथियों से संवाद के बाद भारतेंदु नाट्य उत्सव की तैयारियों में हिस्सा लेते हैं और नाट्य मंडली का अभ्यास भी देखते हैं। अंतिम सीन में दिखाया गया कि भारतेंदु अपने और मौत के बीच लगाई बाजी हार जाते हैं। अंतत: उनकी मृत्यु हो जाती है।