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मोबाइल के इज़ाद से झूठ बोलने के रास्ते तैयार हो गए हैं, अब झूठ भी नैतिकता से परे है

- राज्य संग्रहालय आयोजित में स्पंदन सम्मान समारोह, 7 रचनाकार हुए सम्मानित  

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मोबाइल के इज़ाद से झूठ बोलने के रास्ते तैयार हो गए हैं, अब झूठ भी नैतिकता से परे है

भोपाल। राज्य संग्रहालय में शुक्रवार को 10 वें स्पंदन सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस दौरान वरिष्ठ कथाकार मुकेश वर्मा की अध्यक्षता में राजेश जोशी, महेश कटारे, हरीश पाठक, सत्यनारायण पटेल ने कथापाठ किया। राजेश जोशी ने 'मोबाइल झूठ' कहानी के माध्यम से कहा कि इस अद्भुत यंत्र के इज़ाद से झूठ बोलने के रास्ते तैयार हो गए हैं।

अब झूठ भी नैतिकता से परे है। पहले हमारी भाषा में झूठ का बहुवचन नहीं था, नई तकनीक ने हमारी दुनिया से स्पेस छीन लिया। कथाकार हरीश पाठक ने अपनी कहानी 'पतंग' के माध्यम से मुंबई जैसे महानगर की जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मुम्बई है लज्जा! यहां किसी को कोई भी काम करने में लज्जा नही आती।

यहां सबके तार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और सबका काम एक दूसरे से ही चलता है। सत्यनारायण पटेल ने बदलते परिवेश को परिलक्षित करते हुए 'पर पाजेब ना भीगे' कहानी पढ़ते हुए कहा कि समय बदल रहा है विकास की गंगा बह रही है और डूब रहा है सुख-चैन। वर्ष बीतते गए और शहरों का जंगल में बदलना जारी रहा।

7 रचनाकारों का हुआ सम्मान
इस दौरान हिंदी के कवि और लेखक गोविन्द मिश्र की अध्यक्षता में रचनाकारों को उनकी साहित्य साधना के लिए शाल श्रीफल, स्मृति चिन्ह व सम्मान निधि देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में असगऱ वजाहत को निरंतर सृजनशील वरिष्ठ साहित्य साधना के लिए स्पंदन कथा शिखर सम्मान,

उदयन वाजपेयी को कविता संग्रह 'केवल कुछ वाक्य' के लिए स्पंदन कृति सम्मान, आलोक चटर्जी को रंगकर्म के लिए स्पंदन कला सम्मान, महेश दर्पण को आलोचना कर्म के लिए स्पंदन आलोचना सम्मान, पंकज सुबीर को 'अकाल में उत्सव' उपन्यास के लिए स्पंदन कृति सम्मान और थवई थियाम को स्पंदन युवा सम्मान से सम्मानित किया गया।

सम्मानित रचनाकारों का रचना-पाठ आज

30 मार्च को सुबह 11 बजे से स्वराज भवन में असगऱ वजाहत की अध्यक्षता में उदयन वाजपेयी, प्रेम जनमेजय, आलोक चटर्जी, महेश दर्पण, पंकज सुबीर और थवई थियाम अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ करेंगे।