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किस रत्न को किस धातु में पहनें, पहनने से पहले जरूर जान लें, नहीं तो होगा ये नकारात्मक प्रभाव

किस रत्न को किस धातु में पहनें, पहनने से पहले जरूर जान लें, नहीं तो होगा ये नकारात्मक प्रभाव

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Gemstones astrology

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भोपाल।ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का बेहद महत्व है। ये ऐसी वस्तु है जिन्हें काफी शक्तिशाली माना गया है। ज्योतिष विधा का यह दावा है कि ये रत्न बड़ी से बड़ी परेशानी को अपने प्रभाव से खत्म करने की क्षमता रखते हैं। रत्नों की दुनिया वाकई जादुई-सी लगती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न में करिश्माई शक्तियां होती हैं। रत्न अगर सही समय में और ग्रहों की सही स्थिति को देखकर धारण किए जाएं, तो इनका सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है अन्यथा रत्न विपरीत प्रभाव भी देते हैं। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार रत्न कई प्रकार के होते हैं। हर रत्न किसी विशेष परेशानी या किसी खास मकसद से ही धारण किया जाता है। यह बत गौरतलब है कि हर रत्न को धारण करने से पहले किसी ज्ञानी ज्योतिषी की राय ले लेनी चाहिए। अन्यथा गलत रत्न धारण करना बड़ी मुसीबत ला सकता है। एक बात और, रत्न हर कोई नहीं पहन सकता जिसके लिए जो रत्न बना है, वही पहनना चाहिए। जानिए किस रत्न को किस धातु के साथ धारण किया जाना चाहिए।

जरूर जान लें ये बातें

- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रूबी रत्न को तांबा या सोना में पहनना चाहिए, तो वहीं पन्ना के लिए सोना अनुकूल धातु मानी जाती है।

- यदि आपको मोती पहनने की सलाह दी गई है तो इसे हमेशा चांदी में ही पहनें। मोती को कभी सोने में नहीं पहनना चाहिए वहीं यदि कोई व्यक्ति नीलम धारण कर रहा है तो उसे सोने या प्लैटिनम में बनवाएं।

- पुखराज और मूंगा रत्न ज्योतिषशास्त्र में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पुखराज और मूंगा रत्न को सोने में धारण किया जाता है।

- गोमेद और लहसुनिया को अष्टधातु या फिर त्रिलोह में बनवाकर पहनना चाहिए इससे गलत ग्रहों का प्रभाव काफी कम हो जाता है। गुस्सा शांत करने के लिए चांदी की वस्तु पहनने को कहा जाता है। शनि साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रकोप से बचने के लिए घोड़े की नाल या लोहे का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है।

रत्न पहनते समय क्या करें और क्या ना करें

किसी भी रत्न को दूध में ना डालें। अंगूठी को जल से एक बार धोकर पहनें. रत्न को दूध में डालकर रात भर ना रखें. कई रत्न दूध को सोख लेते हैं और दूध के कण रत्नों में समा कर रत्न को विकृत कर देते हैं. अपने मन की संतुष्टि के लिए अपने ईष्ट देवी की मूर्ति से स्पर्श करा कर रत्न धारण कर सकते हैं.

कब रत्न धारण ना करें

रत्न धारण करने से पहले यह देख लें कि कहीं 4, 9 और 14 तिथि तो नहीं है। इन तारीखों को रत्न धारण नहीं करना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि जिस दिन रत्न धारण करें उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8,12 में ना हो। अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन भी रत्न धारण ना करें। रत्न हमेशा दोपहर से पहले सुबह सूर्य की ओर मुख करके धारण करना चाहिए।

किस नक्षत्र में रत्न धारण करें

मोति, मूंगा जो समुद्र से उत्पन्न रत्न हैं, यदि रेवती, अश्विनी, रोहिणी, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्र में धारण करें तो विशेष शुभ माना जाता है। सुहागिन महिलाएं रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य नक्षत्र में रत्न धारण ना करें। ये रेवती, अश्विनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा नक्षत्र में रत्न धारण करें, तो विशेष लाभ होता है।

रत्न कब बदलें

ग्रहों के 9 रत्नों में से मूंगा और मोति को छोड़कर बाकी बहुमूल्य रत्न कभी बूढ़े नहीं होते हैं। मोती की चमक कम होने पर और मूंगा में खरोंच पड़ जाए तो उसे बदल देना चाहिए। माणिक्य, पन्ना, पुखराज, नीलम और हीरा सदा के लिए होते हैं। इनमें रगड़, खरोच का विशेष असर नहीं होता है। इन्हें बदलने की जरूरत नहीं होती है।

ज्योतिषीय राय लेकर ही इसे धारण करें

महंगे रत्न सोने में धारण करें और सस्ते रत्न जैसे मोति, मूंगा और उपरत्न चांदी या सस्ती धातु में धारण कर सकते हैं। बिना ज्योतिषी राय के रत्न धारण करना जातक की किसी विशेष क्षेत्र की या फिर उसके लिए पूर्ण बर्बादी का कारण बन सकता है। कुछ कुंडलियां ऐसी भी होती हैं जिनमें रत्न धारण करने जैसा कोई भी योग नहीं होता। तो ऐसे में इस तरह के जातक को जीवन भर किसी भी प्रकार का रत्न धारण नहीं करना चाहिए।