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चार साल के हैं ये नन्हें उस्ताद, मंच पर शास्त्रीय परंपराओं को कर रहे जीवंत

रवीन्द्र भवन में 'ताल उत्सव' का आयोजन

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चार साल के हैं ये नन्हें उस्ताद, मंच पर शास्त्रीय परंपराओं को कर रहे जीवंत

भोपाल। रवींद्र भवन में सोमवार को नृत्य कला सांस्कृतिक कल्याण समिति की ओर से 13वां वार्षिक समारोह 'ताल उत्सव' आयोजित किया गया। गायन, वादन, नृत्य और संगीत की विभिन्न परंपराओं से सजे इस समारोह में चार साल के कलाकारों से लेकर गृहणियों तक ने अपनी कला की विस्मयीकारी प्रस्तुति दी। समारोह की शुरुआत तीन और चार साल के कलाकारों ने गणेश स्तुति और सरस्वती वंदना कर की। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भगवान के विभिन्न रूपों का बखान किया।

कालबेलिया में दिखीं लोक की परंपराएं
समारोह को आगे बढ़ाते हुए दो और तीन साल के कलाकारों ने झपताल पर कथक पेश कर माहौल में रंग घोले। इसके बाद युवा कलाकारों ने होली गीत चल जा रे हट नटखट... से राधा और कृष्ण के प्रेम की छटा बिखेरी। वहीं, राजस्थान का लोकनृत्य कालबेलिया युवा कलाकारों ने पेश कर लोक की परंपराओं से परिचित कराया।
6 वर्ष के सम्यक ने बिखेरा ताल का जादू
शास्त्रीय रंग और लोक की परंपराओं की नायाब पेशकश के बाद तबले की ताल ने जैसे रसिकों पर जादू सा कर दिया। यह प्रस्तुति 6 वर्ष के सम्यक सूर्यवंशी ने दी। तबले पर सधे हुए हाथ और अंदाज को देखकर हर किसी ने उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की। इसके बाद प्रसिद्ध राजस्थानी नृत्य घूमर ने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

टैगोर की रचना पर अनूठा कथक
इसके बाद दक्षिण के नृत्य भरतनाट्यम ने सभा में लोगों के दिल जीते, जिसे संस्था के युवा कलाकारों ने अनूठे अंदाज में पेश किया। वहीं, संस्था की गुरु निधि श्रीवास्तव का कथक भी काबिल-ए-तारीफ रहा, उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की रचना जिसे श्रेया घोषाल ने गाया है श्रृंगार को रहने दो... पर एकल नृत्य किया। इसके बादसंस्था के स्टूडेंट्स ने कान्हा रे... गीत पर कृष्ण के लिए गोपियों की भक्ति पेश की। अंत में चार साल के कलाकार आयुष्मान ने मल्हारी गाने पर अपनी अदा बिखेर लोगों का दिल जीत लिया