
अगर आपके पास आ गया है ये चांदी वाला 1 रूपए का सिक्का तो समझ लीजिए आप होने वाले है मालामाल
भोपालः आज से एक दशक पहले तक अगर घर का कोई बड़ा अपने बच्चे को एक रूपए का सिक्का देता था, तो उस बच्चे का खुशी का ठिकाना नहीं रहता था। लेकिन आज के जमाने में घर के किसी बच्चे को तो छोड़िये अगर आप किसी मांगने वाले को भी श्रद्घा भाव से एक रूपए देते हैं, तो कई बार मांगने वालें इस नज़र से देखते हैं, जैसे उन्होंने अब तक का सबसे गरीब इंसान इंसान देख लिया हो। खैर, इसमें उनक कोई दोष नहीं हैं। आज के ज़माने में एक रूपए की कीमत ही वहां जा पहुंची है, जहां से बहुत सी ज़रूरत की चीजें, जो एक दशक पहले आसानी से मिल जाया करती थीं, अब उन्हें उस रुपए से खरीदना नामुमकिन हो गया है। यानि मेहंगाई बढ़ गई है। लेकिन क्या आपको पता हैं कि, यही एक रूपए का सिक्का आपको लखपति भी बना सकता है।
इस 1 रूपए का इतिहास
भारत से अंग्रेजों को भले ही 71 साल पहले भगा दिया गया हो, लेकिन ब्रिटिश किंग जॉर्ज पंचम का ‘सिक्का’ आज भी कहीं कहीं देखा जाता है। जॉर्ज फ्रेडरिक अर्नेस्ट अलबर्ट यानी किंग जॉर्ज पंचम। इस ब्रिटिश शासक का नाम बहुत से लोग नहीं जानते होंगे, क्योंकि उनकी मौत को 79 साल (1936 में) हो चुके हैं। भारत में किंग जॉर्ज पंचम का शासनकाल 1911 से 1936 तक रहा। साल 1919 से 1923 तक उन्होंने दिल्ली से अपनी तस्वीर वाले चांदी के सिक्के जारी किए थे। इससे पहले किंग जॉर्ज की माता महारानी विक्टोरिया ने 1900 व 1901 में शुद्ध चांदी के सिक्के जारी किए थे। किंग जार्ज के जारी किए इन्हीं सिक्कों का बाजार में जबर्दस्त क्रेज है। 1919 से 1923 के बीच जारी यही सिक्के लोगों की डिमांड में हैं।
कहां है इसका बाज़ार
दिवाली के समय में किंग के समय में जारी चांदी के सिक्कों की डिमांड बढ़ जाती है। धनतेरस व दीपावाली पर शगुन के तौर कुछ न कुछ खरीदने की परंपरा है। बाजार में लोग चांदी का यही किंग जार्ज का पुराना सिक्का अभी से बुक कराने लगे हैं। इन्ही सिक्को से का व्यापार करने वाले राजधानी भोपाल के एक कारोबारी नितिन कुखरेजा का कहना है कि, दिपावली के समय में चांदी के इन सिक्कों की एकदम से बुकिंग बढ़ जाती है। इस दौरान यह मूह मांगे दामों पर बेचे जाते हैं। लेकिनऐसा नही है कि, यह सिर्फ ददीपावली के समय ही मिलते है, इन्हें साल भर खरीदा-बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि हालांकि, बाजार में अब पुराने सिक्के बहुत ही कम तादाद में बचे हैं, जिससके चलते नकलचियों ने इसका लाभ उठाना शुरु कर दिया है। मार्केट में कई बार नकली सिक्के भी देखने में आ जाते हैं। जिसकी जांच होने पर पता लगता है कि, वह सिक्के नकली है। इसलिए अगर कभी कोई व्यक्ति यह सिक्का खरीदे तो वह पहले किसी जानकार से इसकी पहचान करा ले।
जानिए इनकी कीमत
वैसे तो यह क्वाइन ऑनलाइन भी बेचे खरीदे जाते हैं, लेकिन मार्केट में एक रूपए के इस रेयर सिक्के की डिमांड को देखते हुए भोपाल के कई सराफा कारोबारी इसे आगरा, दिल्ली, मुबई जैसे बड़े शहरों से बाज़ार में इनके मुल्याकन के अनुसार मंगवा रहे हैं । महारानी विक्टोरिया और किंग जॉर्ज के असली चांदी के सिक्के की कीमत प्रति तोला (10 ग्राम) 1100 रुपये तक है।
Published on:
26 Sept 2018 11:36 am
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