
Ijtima
भोपाल। कोरोना के कारण दो वर्ष बाद राजधानी के ईटखेड़ी में स्थित घासीपुरा में चार दिवसीय इज्तिमा शुक्रवार से शुरू हो गया है। सुबह फजिर की नमाज के साथ इज्तिमा की शुरुआत हो गई। रात को ईशा की नमाज के बाद ये सिलसिला थमेगा। इंसानियत और दीनी तालीम के साथ ही आलमी तब्लीगी इज्तिमा पर्यावरण को बेहतर बनाने में सहयोग करेगा। पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए पहली बार यहां तीन प्रयोग किए गए हैं। इन प्रयोग के तहत प्लास्टिक का उपयोग रोकने, सीवेज ट्रीटमेंट और स्वच्छता बनाए रखने पर जोर रहेगा।
अब तक तीन दिन का आयोजन होता आया है। इस दौरान करीब दो टन वेस्ट यहां से निकलता है। इसके निस्तारण के लिए यहां पर इंतजाम होने हैं। इस संबंध में जिला पंचायत और स्वयं सेवी संस्था काम करेंगी। संस्था के इम्तियाज अली के मुताबिक यह अपने आप में अनोखा होगा। इतने बड़े आयोजन में कई टन कचरा निस्तारण बड़ी समस्या होती है। इसका हल निकालते हुए इसे डिस्पोज करने के लिए प्लांट लगाया जा रहा है। यह परेशानी नहीं बनेगा।
बनाए गए हैं छह हजार टॉयलेट
सीवेज ट्रीटमेंट को लेकर भी इस बार विशेष व्यवस्था इज्तिमा स्थल पर है। बताया गया करीब छह हजार टॉयलेट यहां पर बनाए गए हैं। इस पूरे क्षेत्र में इन्हें 6 किमी की सीवेज लाइन से आपस में जोड़ा गया है। इसे ट्रीट कर पानी छोड़ा जाएगा। यहां पर 6 सेप्टिक टैंक में यह काम होना है। यह पानी खेतों के लिए उपयोग किया जा सकेगा। तीसरा प्रयोग स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए है। इसके तहत नॉनवेज का इस बार इस्तेमाल नहीं होगा। इज्तिमा स्थल पर लगने वाले खाने पीने के स्टॉल वेज रहेंगे। यानि इस बार जमातों को खाने पीने की व्यवस्था के तहत दाल चावल और सब्जियां रहेंगी।
जुनून से मिलती है कामयाबी
ईंटखेड़ी में आयोजित आलमी तब्लीगी इज्तिमा की सफलता में उन हजारों लोगों का सहयोग होता है जो आयोजन में जुड़े रहते हैं। यहां की खासियत है कि कोई भी यहां ओहदेदार नहीं है। सभी जुड़कर एक होकर काम करते हैं। इनमें देशभर के लोग शामिल हैं। खासकर धार्मिक जलसे को शांतिपूर्ण ढंग से सफल बनाने में मुस्लिम वर्ग, प्रशासन और जनप्रतिनिधि शिद्दत से जुटते हैं।’ ये कहना है इज्तिमा इंतजामिया कमेटी के प्रवक्ता अतीक उल इस्लाम का।
पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि कमेटी के सामने हर साल शिरकत करने वालों की लगातार बढ़ रही संख्या के हिसाब से इंतजाम चुनौती होता है। अयोजन की तारीख सभी के मशवरे यानि सलाह से तय होती है। इसमें निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक लोग होते हैं। ऐसे में सभी का जुड़ाव बनता है। इन्हीं बातों ने पूरे विश्व में भोपाल इज्तिमा को पहचान दी है। हालांकि, इस बार दूसरे देशों की जमातें नहीं आ रही हैं लेकिन यह केवल इस वर्ष है। दुनिया के 15 से ज्यादा देशों में इज्तिमा के जरिए अपनी बात पहुंचाने के इस मॉडल को अपनाया है।
छह महीने पहले बनती है कार्ययोजना
इंतजामिया कमेटी से जुड़े लोगों ने बताया कि इज्तिमा में आने वाले लोगों को पर्याप्त सुविधाएं मिल सकें और उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए छह महीने पहले कार्ययोजना तैयार की जाती है। प्रत्येक वॉलेंटियर को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। समय के हिसाब से जमीन समतलीकरण के काम से लेकर तैयारी होती है।
Published on:
18 Nov 2022 01:16 pm
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