
Khambra gang arrested
भोपाल. सीरियल किलर आदेश खांबरा के गिरोह से जुड़े तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आइजी जयदीप प्रसाद ने दावा किया कि गिरफ्तार हुए आरोपी झांसी निवासी परमजीत सिंह उर्फ बिल्ला सरदार, बब्लू उर्फ यशपाल परिहार, कानपुर निवासी गुरुबक्श सिंह बरारा उर्फ लक्की ने लूट-चोरी की 20 वारदात करना कबूली है। पूरे खुलासे में एसआइटी तमाम सवालों के जवाब मीडिया को नहीं दे सकी। आरोपियों के जुबानी कबूलनामे को ही पुलिस अपनी कामयाबी बताती रही। पुलिस यह तक नहीं बता सकी कि किन-किन थानों में इन कबूले गए 20 अपराधों के केस दर्ज हैं। इस पर सिर्फ इतना बताया गया कि तीन राज्यों में अपराध करना आरोपियों ने कबूला है। अपराधों को वेरीफाइ किया जा रहा है। बड़ा सवाल यह उठ रहा कि एसआइटी को आखिरकार इतनी क्या जल्दी थी कि बिना अपराध के वेरीफाई किए ही आईजी से प्रेसवार्ता करा दी।
सड़क पर जिस ट्रक में नजर पड़ती खांबरा के गुरु सरदार का हो जाता
परमजीत सिंह उर्फ बिल्ला आदेश के अपराध की दुनिया का गुरु बताया जा रहा है। जिसकी 90 के दशक में अपराध की दुनिया में सल्तनत थी। 90 के दशक में झांसी से लेकर ग्वालियर तक के सात-आठ हाईवे पर बिल्ला के नाम की तूती बोलती थी। हाईवे पर जिस ट्रक पर उसकी नजर पड़ जाती तो वह ट्रक उसका हो जाता था। 2009 में आदेश खांबरा उसका खास गुर्गा हुआ करता था, उससे ट्रक लूट करने के बाद माल खपाना उसने इससे ही सीखा था। एसआईटी ने 10 दिन पहले कानपुर का जिस कबाड़ी को गिरफ्तार किया था, उसको वह भी इसका साथी बताया गया है। परमजीत हत्या, लूट के मामले में पहले भी गिरफ्तार हो चुका है। मामले में अबतक 12 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
परमजीत उर्फ बिल्ला और साहब को देता था ट्रक
पुलिस पहले दिन से दावा करती नजर आ रही थी कि आदेश से लूटे ट्रक परमजीत उर्फ बिल्ला निवासी झांसी और साहब सिंह निवासी ग्वालियर के माध्यम से बिहार और नार्थ-ईस्ट में तरफ बेचते थे, लेकिन एसआईअी एक ट्रक अभी तक इन स्थानों से बरामद नहीं कर पाई है। जबकि कई बार टीमें बिहार और नागलैंड जा चुकी है।
एसआईटी के आंकड़ों की बाजीगरी: 34 हत्या, 20 लूट
एसआईटी प्रमुख एसपी राहुल लोढ़ा ने दावा कर रहे कि गिरोह ने अब तक 34 हत्याएं, 20 लूट, चोरी की वारदात कबूल चुके हैं। जबकि 34 हत्याओं में 8 हत्याओं में खांबरा व उसके साथी पूर्व में जेल में बंद हो चुके हैं। कोर्ट में केस चल रहा है। लेकिन, एसआईटी ने हत्याओं के पूर्व के प्रकरणों को भी जोड़कर अपनी वाहवाही लूटती रही। एसआईटी की बड़ी नाकामी यह रही कि जितने अपराध के दावे किए गए उसके मुताबिक सबूत नहीं जुटा पाई। सिवाय दो लूटे गए ट्रक के अलावा। एसआईटी के पूरे खुलासे कबूल नामें पर आधारित हैं।
एसआईटी का सिलसिलेवार झूठ: वाहिद नूर, विजय को बताया था हत्यारा
अगस्त 2018 में बिलखिरिया इलाके में ट्रक ड्राइवर की हत्या के आरोप में एसआईटी ने विजय श्रीवास्तव व उसके साथियों को पकड़कर दावा किया कि इसी ने अपने साथी वाहिद नूर के साथ मिलकर ड्राइवर की हत्या की है। इसी बीच इत्तेफाक से पुलिस को आदेश खांबरा का साथी जयकरण हाथ लग गया। इसके बाद पुलिस ने जयकरण को गिरोह का मुखिया बना दिया। सख्ती से पूछताछ के बाद जयकरण ने आदेश खांबरा, तुकाराम को मुख्य सरगना बताया। एसआईटी ने उसके खुलासे के बाद खांबरा, तुकाराम को पकड़ उन्हें मास्टर माइंड होने का दावा किया।
एसआईटी नहीं दे सकी इन सवालों के जवाब
- एसआईटी 34 हत्याओं के कबूल करने की बात कह रही है। जबकि कई पूर्व की हत्याएं हैं। कोर्ट में विचाराधीन हैं। कोर्ट में विचारधीन अपराध के आंकड़ों को जोड़कर बताने के पीछे एसआईटी का क्या मकसद है?
- जब इतनी वारदात खांबरा गैंग ने ही की है तो बिलखिरिया, मिसरोद में हुई वारदात के अलावा एसआईटी अन्य वारदातों के सबूत जुटाने में अबतक क्यों नाकाम रही?
- पुलिस ने शनिवार को लूट के 20 मामलों के खुलासे किया, इनमें से एक भी फरियादी का नाम, अपराध किस थाने में दर्ज हुआ इनके नाम क्यों उजागर नहीं कर सकी?
- गिरोह के लूट-चोरी के मॉल की रकम आखिरकार क्यों बरामद नहीं हो सकी?
- गोविंदपुरा गेट के सामने से ट्रक क्लीनर ड्राइवर गायब हुए, एसआईटी दावा कर रही उनकी हत्या आदेश ने कबूल की है, आखिरकार, उनकी लाश बरामद क्यों नहीं हो सकी?
- जिस शक्कर के ट्रक को आदेश खांबरा ने बेचा था, उसकी शक्कर को बरामद क्यों नहीं किया गया?
Published on:
07 Oct 2018 05:03 am
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