भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले करीब एक साल में 12 बाघों की मौत हो चुकी है। कभी टाइगर स्टेट कहलाने वाले मध्यप्रदेश में आज बाघों का शिकार सबसे ज्यादा हो रहा है। इन मौतों ने शिवराज सरकार को सवालों में ला दिया है। कुछ ऑफिशियल रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि बाघों पर पूरी तरह से नजर नहीं रखी जा रही। कागजों और फाइलों में ही वन अधिकारी गश्त कर रहे हैं। हकीकत में वे गश्त कर ही नहीं रहे।
करनी पड़ती है इतनी गश्त
रेंज सहायक से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक किसी के लिए रियायत नहीं है। इन्हें हर महीने 30 किलोमीटर से लेकर 100 किलोमीटर पैदल गश्त करना है। हाथी और वाहनों से गश्त के नियम अलग हैं।
12 बाघों की मौत
मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी रवि श्रीवास्तव की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पेंच एवं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जून 2015 से अब तक हुई 12 बाघों की मौत हुई है। इनमें सात बाघ ऐसे थो जिनकी जान शिकारियों और ग्रामीणों के हाथों गई है।
इन्हें पैदल नापना है इतना जंगल
फील्ड डायरेक्टर - 30 किलोमीटर (हर महीने)
डिप्टी डायरेक्टर : 50 किलोमीटर
असिस्टेंट डायरेक्टर/ एसीएफ/ अधीक्षक : 65 किलोमीटर
रेंज अफसर : 80 किलोमीटर
रेंज सहायक : 100 किलोमीटर
यह है सिक्योरिटी प्लान
बांधवगढ़ सहित अन्य टाइगर रिजर्व में सिक्योरिटी प्लान लागू है। बांधवगढ़ टारगर रिजर्व, मध्यप्रदेश सरकार और एनटीसीए के मध्य हुए त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार सिक्योरिटी प्लान बना है। इसमें बाघों की मॉनिटरिंग, सिक्योरिटी प्लान और सिक्योरिटी आडिट शामिल है।