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टाइगर स्टेट में पर्यटक नहीं आते, रोड-एयर कनेक्टिविटी मजबूत हो तो कमा सकते हैं 100 करोड़

टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में 785 बाघ होने के बाद भी प्रदेश देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पा रहा। मध्यप्रदेश के 6 टाइगर रिजर्व और 16 नेशनल पार्क में से जितनी आय होती है, अकेले उतनी आय राजस्थान का रणथंबौर नेशनल पार्क कर लेते है। रणथंबौर ने जहां 46 करोड़ की आय हुई, तो मध्यप्रदेश को महज 52 करोड़ की आय ही हो पाई। विशेषज्ञों का कहना है रोड और एयर कनेक्टिविटी को बेहतर किया जाए तो मध्यप्रदेश हर साल 100 करोड़ से ज्यादा कमाई कर सकता है।

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भोपाल। राजस्थान की अपेक्षा मप्र विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में उतना सफल नहीं हो पाया। रणथंबौर में सालान करीब 4.80 लाख पर्यटक आते हैं, इसमें से 2.50 लाख पर्यटक विदेशी होती हैं। पिछले तीन माह में कोर एरिया में प्रतिबंध होने के बाद भी यहां 35 हजार पर्यटक पहुंचे। विदेशी पर्यटक को जिप्सी से करीब 14 हजार और भारतीय पर्यटक को 8 हजार रुपए (प्रति गाड़ी 6 पर्यटक) चुकाने पड़ते हैं। वहीं, तत्काल बुकिंग कराने पर 10 भारतीय को और विदेशी को 25 हजार तक अकेले चुकना पड़ता है। वहीं, मप्र में देसी पर्यटकों से 5800 और विदेशी पर्यटकों को 9600 रुपए (प्रति गाड़ी 6 पर्यटक) चुकाने होते हैं।

रोड-रेल और एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाना होगा

रिटायर्ड आइएफएस जेएस चौहान का कहना है कि रणथंबौर को दिल्ली-आगरा और जयपुर के पास होने का बड़ा फायदा है। यहां से उसे विदेशी पर्यटकों के लिए एयर कनेक्टिविटी मिलती है। वहीं, दिल्ली-मुंबई रेलवे लाइन से पास होना और नेशनल हाईवे होने से भी यहां पर्यटकों का पहुंचना आसान होता है। हमारे टाइगर रिजर्व बड़े शहरों से थोड़े दूर हैं। हमें पास के बड़े शहरों में रोड, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने पर काम करना होगा। हमारे टाइगर रिजर्व में घना जंगल होने से यहां साइटिंग अपेक्षाकृत कम होती है। यही भी एक बड़ा कारण है। पर्यटन बोर्ड के एएमडी विवेक क्षोत्रिय का कहना है कि वन विभाग के साथ मिलकर हम लगातार पर्यटन बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं।

टूरिस्ट फ्रेंडली होना पड़ेगा

रिटायर्ड आइएफएस एचएस पावला का कहना है कि मध्यप्रदेश में अभी उतने विदेशी पर्यटक नहीं आते। पेइंग कैपिसिटी भी एक बड़ा कारण है। राज्य को पर्यटन फ्रेंडली नीति बनानी होगी। जहां टूर एण्ड ट्रैवल ऑपरेटर को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, बुकिंग में दिक्कत नहीं होता। वे पर्यटकों को वहां भ्रमण करना पसंद करते हैं। अब कॉम्पीटिशन का जमाना है तो हमें नियमों को एक बार रिव्यू करना होगा। यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टाइगर रिजर्व के मैनेजमेंट को भी बेहतर बनाना होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

रातापानी में भी नहीं आए पर्यटक

वार्षिक बाघ गणना-2022 के अनुसार राजस्थान में 88 बाघ हैं, जबकि भोपाल के आसपास 22 और राजधानी से महज 20 किलोमीटर दूर रातापानी अभयारण्य क्षेत्र में करीब 80 बाघ हैं। इसके बाद भी यहां पर्यटन ना के बराबर है। पिछले सीजन में यहां महज 2 विदेशी आए, यहां महज 28 लाख की आय ही हुई। वहीं, 6 टाइगर रिवर्ज में भी 52709 विदेशी और 16 नेशनल पार्क में महज 33 विदेशी पर्यक ही पहुंचे। सबसे ज्यादा बांधवगढ़ में 19199 और कान्हा में 14809 विदेशी पर्यटक आए। वर्ष-2021-22 में भी हमारे यहां 10950 विदेशी पर्यटक ही आए थे।

400 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
देश के सबसे ज्यादा कमाई वाले रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पर्यटन उद्योग सबसे अधिक होने से पूरे क्षेत्र मे पर्यटन उद्योग फैला है। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ने से जिले को हर साल वन्यजीव पर्यटन से 400 करोड़ की आय होती है। रणथंभौर में लगभग दो हजार होटल कमरे और लगभग बारह सौ पर्यटक वाहन हैं। कान्हा ने 12.71 करोड़, बांधवगढ़ ने 11.12 करोड़, पेंच ने 5.95 और पन्ना ने 3.32, सतपुड़ा ने 5.20 और संजय ने 19.75 लाख रुपए की कमाई की। वहीं, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क ने 13 करोड़ 13 लाख 80 हजार रुपए की कमाई की। जबकि, पिछले वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ के आसपास की कमाई की थी। इस बार 3 लाख 65 हजार से ज्यादा कॉर्बेट पार्क पहुंचे। एसोशिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेट ऑफ इंडिया के एमपी अध्यक्ष अतुल सिंह के अनुसार इंदौर को छोड़कर प्रदेश के किसी भी शहर में एयर कनेक्टिविटी बहुत अच्छी नहीं है, इंदौर के आसपास कोई टाइगर रिजर्व नहीं है। ग्वालियर, खजुराहो, जबलपुर और भोपाल में जब तक डोमेस्टिक और इंटरनेशनल लेवल की एयर कनेक्टिविटी नहीं होगी, विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी। इनके आसपास रेल कनेक्टिविटी भी बहुत अच्छी नहीं है। रातापानी को अभी टाइगर होने के बाद भी उतना एक्स्पोज़र नहीं मिल पाया है।