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शिकार के बाद भोपाल शहर में एक घंटे तक टहली बाघिन,आने जाने वालों के उड़े होश

जागरण लेक सिटी के पास लोगों ने गुरुवार को बाघिन को लगभग एक घंटे तक एक ही स्थान पर टहलते देखा।

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भोपाल। लंबे समय से कलियासोत केरवा के जंगलों में डेरा जमाए बाघिन टी-123 ने एक बार फिर से गाय का शिकार किया है। जागरण लेक सिटी के पास लोगों ने गुरुवार को बाघिन को लगभग एक घंटे तक एक ही स्थान पर टहलते देखा। लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। हालांकि जब तक टीम मौके पर पहुंची, बाघिन वहां से जा चुकी थी।

जानकारी के अनुसार मामला गुरुवार शाम 04 से 05 बजे के बीच का है। कुछ लोग 13 शटर गेट से जागरण लेक सिटी की ओर जा रहे थे तभी उन्हें बाघिन दिखाई दी। उत्सुकतावश लोग वहां पर रुक गए। काफी देर तक वे बाघिन को देखते रहे। उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों को बाघिन के होने की सूचना दी। जब तक कर्मचारी पहुंचे तक बाघिन वहां से जा चुकी थी।

इससे पहले भोपाल लंबे समय से कलियासोत केरवा के जंगलों में डेरा जमाए बाघ टी-121 और समसगढ़ एवं उसके आसपास के जंगलों में रह रही बाघिन टी-123 ने ठिकानों की अदला-बदली कर ली थी। दोनों को एक सप्ताह पहले कलियासोत और केरवा के जंगल में एक साथ देखा गया था। दो से तीन दिन साथ में रहने के बाद से बाघिन टी-123 यहां पर जमी हुई है, जबकि बाघ टी-121 ने इस इलाके को छोड़ दिया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसे समसगढ़ की ओर देखा गया है। जानकारों के अनुसार इस समय दोनों ही बाघों का व्यवहार अजीब है।

जंगल में ठिकाने बदलने जैसे मामले कम ही देखने को मिलते हैं। वन विभाग को एक सप्ताह पहले दोनों के पग माक्र्स एक साथ मिले थे। अनुमान है कि दोनों ने जोड़ा बना लिया है। केरवा चौकी के छिप्टी रेंजर आरबी शर्मा ने बताया कि बाघ टी-121 के कलियासोत केरवा के जंगलों में पग माक्र्स मिलने बंद हो गए। यहां केवल बाघिन टी-123 के पग माक्र्स वन विभाग के अधिकारियों को अब मिल रहे हैं। गश्तीदल के एक कर्मचारी के अनुसार इस समय बाघ टी-121 समसगढ़ की ओर निकल गया है। यह वही इलाका है जहां अभी तक बाघिन टी-123 का कब्जा हुआ करता था। यहां कई शिकार बाघिन ने किए हैं।

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