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मन का बोझ संभालने के लिए होती है जीवन साथी की जरूरत

रवीन्द्र भवन में सिंधी नाटक 'पीउ हैरानु पुटु परेशानु' का मंचन  

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मन का बोझ संभालने के लिए होती है जीवन साथी की जरूरत

भोपाल। अखण्ड सिंधु संसार विचार मंच का 20वां नाट्य उत्सव रविवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित किया गया। नाट्य उत्सव में न्यू सिंधु आर्ट अकादमी, मुंबई के कलाकारों ने नीरू आसरानी के निर्देशन में सिंधी नाटक 'पीउ हैरानु पुटु परेशानु' (बाप हैरान बेटा परेशान) का मंचन किया। 2 घंटे 20 मिनट की अवधि वाले नाटक में ऑनस्टेज 5 कलाकारों ने अभिनय किया। नाटक के माध्यम से ये संदेश दिया गया कि बुढ़ापे में आदमी लाठी से तन का बोझ तो संभाल सकता है, लेकिन मन का बोझ संभालने के लिए एक साथी की जरूरत होती है।

नाटक की कहानी मुरली नाम के एक विधुर की कहानी है। जिसे अकेलेपन से दूर होने के लिए जीवनसाथी की जरूरत है। उसके जीवन में एक दिन मोहिनी पसंद आ जाती है। वह अपने मित्र पं. ओमप्रकाश शर्मा को महिला के पिता के रिश्ता पक्का करने भेजता है। ओमप्रकाश को मोहिनी पसंद आ जाती है। वह रिश्ते को तुड़वाने की कोशिश करने लगता है। जब ये बात मुरली को पता चलती है तो वह उसे वहां से भगा देता है। ओमप्रकाश को रास्ते में मुरली का बेटा राहुल मिल जाता है। राहुल को ओमप्रकाश की बेटी काजल पंसद है और वह शादी करना चाहता है। राहुल, उसे अपने घर ले आता है। ओमप्रकाश को देख मुरली परेशान हो जाता है। इधर, ओमप्रकाश एक शर्त रख देता है कि उसकी शादी मोहिनी से होगी, तभी वह राहुल और काजल की शादी होने देगा।

नौकरानी से शादी करा देती है
मुरली अपने बेटे के लिए बहू की तलाश कर रहा है। खुद के बुढ़ापे और बेटे की बढ़ती उम्र को देखकर वह जल्द ही बेटे की शादी करने की कोशिश करता है, लेकिन बेटे की बेकार शायरी से भी परेशान है क्योंकि बेटे की शायरी के कारण उसे कोई पसंद नहीं करता है। ओमप्रकाश को रास्ते से हटाने के लिए मोहिनी एक चाल खेलती है। वह उससे शादी का वादा कर मंडप में अपनी नौकरानी को बैठा देती है। घूंघट होने के कारण वह नौकरी को ही मोहिनी समझ लेता है। इस तरह मुरली और मोहिनी का रास्ता साफ हो जाता है।