
भोपाल। टॉयलेट एक प्रेम कथा फिल्म कल ही सिनेमाघर तक पहुंचने वाली है। आपको बता दें कि भोपाल के होशंगाबाद रोड और मध्यप्रदेश की कई खूबसूरत लोकेशन्स पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है, वहीं आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि इस फिल्म की कहानी का सफर भी भोपाल से ही शुरू हुआ है। जानें टॉयलेट एक प्रेम कथा कैसे बन गई भोपाल के लिए खास...
एक नई नवेली दुल्हन और स्वच्छता अभियान के तहत उसका विरोध ऐसा कि भारत सरकार ने उसे सम्मानित किया, अखबारों की सुर्खियां बनीं इस खबर ने अब टॉयलेट एक प्रेम कथा का रूप ले लिया। बैतूल की रहने वाली एक सामान्य लड़की कैसे देशभर में छा गई, जानें इंट्रेस्टिंग कहानी...
चिचोली से भीमपुर ब्लाक के झीटूढाना गांव में ब्याह कर आई अनीता बाई नर्रे को माइके से बिदा होकर ससुराल आए केवल दूसरा ही दिन था कि उसने पति का घर छोड़ दिया। वह भी सिर्फ इसलिए कि ससुराल में शौचालय नहीं था। खुले में शौच के लिए मजबूर हुई अनीता ने पहले पति को समझाया। जब उसे लगा कि पति उसकी बात को गंभीरता से नहीं ले रहा है, उसी समय उसने अपना संदूक उठाया और निकल गई माइके के रास्ते। 8 दिसंबर 2011 को सामने आए इस मामले के बाद फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं को इस कहानी ने इतना प्रेरित किया कि ये कहानी टॉयलेट एक प्रेम कथा के रूप में तैयार हो गई।
भोपाल से शुरू हुई शूटिंग और यहीं से बना किस्सा भी
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म की शूटिंग ही भोपाल में नहीं हुई है, बल्कि इस कहानी का पहला शब्द भी भोपाल से ही शुरू हुआ। दरअसल मूल रूप से भोपाल के रहने वाले और मुंबई बेस्ड एक फिल्म निर्देशक ने बैतूल जिले की महिला अनीता बाई नर्रे के साहस की कहानी स्क्रिप्ट राइटर गरिमा और सिद्धार्थ को सुनाई और फिल्म की कहानी तैयार हो गई।
एमपी के साथ उत्तर प्रदेश भी बनाता है खास
वैसे तो फिल्म की पूरी कहानी मध्यप्रदेश की इस नई नवेली दुल्हन के साहस पर ही है, लेकिन दर्शकों की पसंद को देखते हुए इसमें उत्तर प्रदेश के मथुरा को भी शामिल किया गया है। क्योंकि यहां भी एक युवती प्रियंका शौचालय न होने के कारण ससुराल छोड़ मायके पहुंच गई थी।
साहस को मिला सम्मान
अनीता के इस साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया था। अनीता को पांच लाख रुपए का पुरस्कार पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने राष्ट्रपति भवन में दिया था।
मध्यप्रदेश बना महिलाओं की प्रेरणा
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की कहानी पर आधारित टॉयलेट एक प्रेम कथा की असली किरदार अनीता का खुले में शौच से इनकार और टॉयलेट बनवाने के लिए ससुराल छोडऩे का साहस देश की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बना। टॉयलेट के लिए ससुराल छोडऩे वाली ऐसी युवतियों की कहानी मध्यप्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश के मथुरा के अलावा कई शहरों से सामने आई। अनीता आज भारत सरकार के स्वच्छता अभियान के लिए जागरुकता का ऐसा चेहरा बन गई हैं कि फिल्म देखते हुए भी दर्शक उन्हीं की बातें करते नजर आएंगे।
अक्षय कुमार ने सीएम से ली थी शूटिंग की अनुमति
आपको बता दें कि इस फिल्म की शूटिंग के लिए अक्षय कुमार ने प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान से शूटिंग की अनुमति ली थी। वे भोपाल आए, सीएम से मिले। फिल्म शूटिंग के लिए परमिशन मांगी। परमिशन मिलते ही दो महीने बाद वे डायरेक्टर और पूरी टीम के साथ भोपाल पहुंच गए।
भोपाल समेत एमपी की इन लोकेशन्स परकी गई शूटिंग
मध्यप्रदेश के बैतूल की सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग राजधानी भोपाल समेत एमपी की कई लोकेशन्स पर की गई। अक्षय कुमार की इस फिल्म की शूटिंग सीहोर से शुरू हुई फिर भोपाल में और उसके आसपास की गई। वहीं मध्यप्रदेश के महेश्वर में भी फिल्म का कुछ हिस्सा फिल्माया गया है।
Updated on:
10 Aug 2017 01:33 pm
Published on:
10 Aug 2017 12:43 pm
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