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अब लीजिए इलेक्ट्रिक क्रूज और स्पीड बोट का मजा, नहीं होगा प्रदूषण, 66 लाख की होगी कमाई

भोपाल। एनजीटी के फैसले के बाद पर्यटन विभाग अब क्रूज और स्पीड बोट को इलेक्ट्रिक बोट में बदलने जा रहा है। इसमें जर्मन तकनीक के मोटर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे निगम का संचालन खर्च कम होने के साथ ही प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। क्रूज और नावों में अभी इस तकनीक को लगाने में 5 माह का समय लग सकता है।

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इधर, नगर निगम एनजीटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की भी तैयारी कर रहा है। पर्यटन निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे फोर स्ट्रोक इंजन वाली बोट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे जलाशय और नदी में किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैलता है।

इलेक्ट्रिक बनाने में खर्च होंगे 15 लाख

प्रदेश में 6 स्थानों पर क्रूज का संचालन होता है। इसमें भोपाल, हनुवंतिया, गांधी सागर और तवा में 1-1 क्रूज तथा बरगी में 2 क्रूज का संचालन होता है। एक कूज को इलेक्ट्रिक बनाने में 15 लाख रुपए का खर्च आएगा। वहीं, प्रदेश में 55 स्पीड बोट्स हैं। एक बोट को बदलने में 6 से 8 लाख लगेंगे।

हर साल 8 करोड़ रुपए का कारोबार

पर्यटन निगम प्रदेश के 14 जलाशय और नदियों में जल पर्यटन गतिविधियों का संचालन करता है। इससे हर साल करीब 8 करोड़ (हर महीने 66 लाख) की कमाई होती है। निगम के तकनीकी सलाहकार राजेन्द फोर स्ट्रोक इंजन वाली बोट्स निगम के अनुसार, क्रूज और का इस्तेमाल करते हैं। इससे बोट्स में इलेक्ट्रिक कार की जलाशय या नदी में किसी तरह तरह बैटरी चार्ज कर इसका संचालन किया जा सकता है।