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प्रदेश में मौजूद तीन विश्व धरोहरों में से पर्यटकों की पहली पसंद खजुराहो के मंदिर, साढ़े तीन साल में आए 8.67 लाख सैलानी

-मौजूदा वित्त वर्ष में छह महीने में 1.68 लाख सैलानियों से हुई 67.26 लाख की आय-प्रदेश में खजुराहो, सांची और भीम बैटका को केंद्र संरक्षित विश्व धरोहरों का है दर्जा

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प्रदेश में मौजूद तीन विश्व धरोहरों में से पर्यटकों की पहली पसंद खजुराहो के मंदिर, साढ़े तीन साल में आए 8.67 लाख सैलानी

प्रदेश में मौजूद तीन विश्व धरोहरों में से पर्यटकों की पहली पसंद खजुराहो के मंदिर, साढ़े तीन साल में आए 8.67 लाख सैलानी

मनीष कुशवाह
भोपाल. विश्व धरोहरों की सूची में दर्ज मध्यप्रदेश के तीन ऐतिहासिक स्थलों में से खजुराहो के मंदिर सैलानियों की पहली पसंद बने हुए हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2022-23 में सितंबर महीने तक यहां 1.68 लाख सैलानियों ने आमद दर्ज कराई और इनसे 67.26 लाख रुपए की आमदनी हुई है। सैलानियों ने यहां मौजूद स्मारकों को देखने के लिए तय दाशि चुकाई है। साढ़े तीन साल में खजुराहो में 8.69 लाख से अधिक पर्यटक आए और इनसे 5.44 करोड़ रुपए की आय हुई। यहां बता दें, केंद्र सरकार द्वारा देशभर में संरक्षित और संधारित विश्व धरोहरों वाले स्मारकों की संख्या 24 है, जिनमें से तीन धरोहर मप्र में हैं। खजुराहो के मंदिरों को वर्ष 1986 में, सांची के बौद्ध स्मारक को 1989 में तो रायसेन जिले के भीम बैटका के शैलचित्रों को वर्ष 2003 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था। विश्व धरोहरों की सूची में शामिल आगरा का ताजमहल देशी और विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद है। यहां इस साल 19.94 लाख सैलानी आए और इनसे 20.56 करोड़ रुपए की आय हुई।
विश्व धरोहरों में से तीन मप्र में
विश्व धरोहरों की देखरेख और संरक्षण का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास है। इस सूची में मप्र से खजुराहो, सांची और भीम बैटका शामिल है। उप्र के आगरा का किला, ताजमहल और फतेहपुर सीकरी के अलावा दिल्ली का लाल किला, कुतुब मीनार और हुंमायु का मकबरा को विश्व धरोहर के रूप में संरक्षित किया है। महाराष्ट्र से अंजता और एलोरा समेत एलिफेंटा की गुफाओं को इस सूची में जगह मिली है। तमिलनाडू में महाबलीपुरम के स्मारकों के समूह, तंजावुर-ंगइकोंडचोलपुरम और दारासुरम चोल मंदिर, कर्नाटक के हम्पी स्मारकों का समूह, पडक्कल स्थित स्मारक, गुजरात के धोलावीरा, पाटन की रानी की बावड़ी, चंपानेर-पावागढ़ पुुरातत्व पार्क, राजस्थान के चित्तौडगढ़़, कुम्भलगढ़, जैसलमेर, रणथम्बौर, आमेर और गगरोन का किला, बिहार का नालंदा महाविहार, ओडिशा स्थित कोणार्क का सूर्य मंदिर, गोवा के चर्च और कॉन्वेंट और तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर को विश्व धरोहर घोषित किया गया है।

प्रदेश में सांची दूसरी पसंदीदा जगह
मप्र के तीन विश्व धरोहर वाले स्थलो में खजुराहो के बाद सांची के बौद्ध स्मारक सैलानियों के पसंदीदा हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीने में ही यहां 93.40 हजार सैलानियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इनसे 37.98 लाख रुपए की आमदनी हुई। वर्ष 2019-20 से 2022-23 के बीच सांची आने वाले सैलानियों की संख्या 5.61 लाख रही और इनसे 2.27 करोड़ रुपए की आमदनी हुई। रायसेन के भीम बैटका में इस साल 70 हजार से अधिक सैलानी पहुंचे हैं।
ताज, लाल किला और कुतुब मीनार में सबसे अधिक आमद
मप्र में मौजूद तीन विश्व धरोहरों की तुलना में उप्र के आगरा में स्थित ताजमहल, दिल्ली के लाल किला और कुतुब मीनार में सैलानियों की आमद बहुत अधिक है। साढ़े तीन साल में ताजमहल का दीदार करने आने वालों की संख्या 1.24 करोड़ रही और इनसे 1.52 अरब रुपए का राजस्व मिला। दस दरमियान कुतुब मीनार देखने 49.48 लाख सैलानी आए और इनसे 30 करोड़ रुपए की आय हुई। 49.23 लाख सैलानी लाल किला देखने आए और इनसे 29.23 करोड़ रुपए राजस्व मिला।
च्केंद्रज् ने मप्र में धरोहरों पर खर्च किए 7.71 करोड़ रुपए
मप्र के तीनों विश्व धरोहर स्थलों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा चार साल में कुल 7.71 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस साल सबसे अधिक 1.65 करोड़ रुपए सांची में खर्च किए हैं। एएसआइ ने ये राशि पर्यटक सुविधाओ के विस्तार के साथ ही यहां मौजूद स्मारकों के संरक्षण पर खर्च की है। केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2022-23 में सबसे अधिक 10.49 करोड़ रुपए गोवा के ऐतिहासिक चर्च के संरक्षण पर खर्च की है। दिल्ली के लाल किला के संरक्षण पर 5.83 करोड़ रुपए तो कर्नाटक के हम्पी स्थित स्मारकों के संरक्षण पर 2.19 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
मप्र में धरोहरों पर चार साल में खर्च की इतनी राशि
स्थल-----2019-20---2020-21---2021-22---2022-23
खजुराहो---12356235---9030715--10929753--6464791
सांची----5936164----4898805----5886562--16456546
भीमबैटका--154328---1064411---1050789---1938868
(राशि रुपए में)