19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का सच हैरान कर देगा आपको…

 शहर के सात  सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोजाना सिर्फ 56 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट हो पाता है।

2 min read
Google source verification

image

Sumeet Pandey

Dec 14, 2016

Bhopal,pollution in bada talab water,by sewage,bpl

Bhopal,pollution in bada talab water,by sewage,bpl

भोपाल . शहर के सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोजाना सिर्फ 56 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट हो पाता है। नगर निगम के पास इस ट्रीटेड वाटर के री-यूज का कोई प्लान नहीं है इसलिए रोजाना करीब 5.6 करोड़ लीटर ट्रीटेट वाटर वापस गंदे नाले में ही मिल जाता है। वाटर कंजर्वेशन एक्सपर्ट डॉ सुभाष सी पांडेय के मुताबिक अगर इस पानी का ही बेहतर ढंग से उपयोग किया जाए तो शहर में काफी हद तक पानी की किल्लत कम हो सकती है।

ट्रीटेड वाटर के री-यूज का नहीं है कोई प्लान
भोपाल नगर निगम के पास ट्रीटेड वाटर के री-यूज का कोई प्लान नहीं है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से 2015 में एसटीपी की परफॉरर्मेंस इवैल्युएशन रिपोर्ट में साफ तौर पर इस बात को उठाया था। सीपीसीबी ने कहा था कि ट्रीटेड सीवेज के री-यूज का कोई प्लान नहीं बनाया है जिससे ट्रीटेड सीवेज नजदीकी वेस्टवाटर नाले में जाकर मिल जाता है।

80 किमी तक से ले जाते हैं ट्रीटेड वाटर
एनजीटी में चल रहे एक मामले की सुनवाई में ट्रीटेड वाटर के री-यूज को लेकर उदयपुर मॉडल पेश किया गया। एनजीटी ने इसकी तर्ज पर ही मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र के एक मामले में फैसला सुनाया। उदयपुर शहर से निकलने वाले वेस्ट वाटर को ट्रीट करने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने खुद 20 एमएलडी क्षमता का एसटीपी लगाया। इसका संचालन वे मेंटेनेंस स्वयं उन्हीं के द्वारा किया जाता है। रोजाना करीब 20 करोड़ लीटर पानीको वह पाइपलाइन के जरिए उदयपुर से करीब 80 किमी भीलवाड़ा जिले में मौजूद दरीबा गांव स्थित प्लांट तक ले गए।

नगर निगम के अंतर्गत आने वाले उद्यानिकी विभाग द्वारा शहर के 112 पार्क मेंटेन किए जाते हैं। इसमें हम तालाब व नालों के ग्रे-वॉटर का ही इस्तेमाल करते हैं। शहर में मौजूद एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड वॉटर को पार्क व कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी में उपयोग कर इसका बेहतर री-यूज किया जा सकता है, नगर निगम इस संबंध में भी प्लानिंग करेगा।
सुधा भार्गव, उपायुक्त, नगर निगम भोपाल

पीएचई के जिम्मेदारी सिर्फ इन सातों एसटीपी के संचालन व मेंटनेंस की है। ट्रीटेड वाटर के उपयोग को लेकर जो भी करना है नगर निगम को करना है।
एसके चतुर्वेदी, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, पीएचई

ये भी पढ़ें

image