
नेशनल हैंडलूम डे
भोपाल। मप्र की कला और संस्कृति की पहचान पूरी दुनिया में है। अगर बात हैंडलूम की हो तो देश में प्रदेश का नाम सबसे पहले आता है। यहां चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट और बटिक के हस्तशिल्प दुनिया में चर्चित हैं। हैंडलूम डे के मौके पर पत्रिका प्लस ऐसे विवर्स से रू-ब-रू करा रहा है जिन्होंने अपने इनोवेशन से इस क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। मप्र के ट्राइबल आर्ट से लेकर ऐतिहासिक धरोहर और कल्चरल फॉम्र्स पर डिजाइंस तैयार किए हैं।
ट्राइबल आर्ट को कर रहा हूं प्रमोट
नवनीत व्यास ने बताया कि मैं पिछले 8 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मध्यप्रदेश का ट्राइबल आर्ट देश-दुनिया में काफी तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है। यूथ भी इसे पसंद करने लगे हैं। मेरी कोशिश है कि मैं अपने स्तर पर इसे प्रमोट कर सकूँ । मैं मांडना आर्ट, पिथौरा, गोंड, गोदना, भीली जैसे ट्राइबल आर्ट के डिजाइंस को कपड़े पर उतार रहा हूं। इसे तैयार करना आसान नहीं होता क्योंकि इसके पिक्चर्स नहीं मिल पाते तो ब्लॉक तैयार करना कठिन होता है। कई ब्लॉक कल्पनाओं के आधार पर तैयार किए जाते हैं तो कुछ डिजाइंस ट्राइबल आर्ट पर लिखी किताबों से मिल जाते हैं। मैंने बैगा समुदाय की गोदना प्रथा पर ब्लॉक प्रिंटिंग की है तो तो गोंड पेंटिंग के डिजाइन को होम फर्निश के लिए ब्लॉक प्रिंट्स के माध्यम से तैयार किया है।
इम्युनिटी बूस्टर साड़ी आर्युवस्त्र बनाई
विनोद मालेवार ने बताया कि मैंने कोविड को देखते हुए इम्युनिटी बूस्टर साड़ी 'आर्युवस्त्र तैयार की है। इसे बनाने में लौंग, बड़ी इलायची, काली मिर्च सहित नैचुरल हर्ब और अन्य मसालों का मिश्रण उपयोग किया जाता है। इस मिश्रण को सूती कपड़े की पोटली में बांधकर तीन दिन तक पानी में स्टीम की जाती है। वहीं, सिमरन कौर ने बताया कि मैंने ब्लॉक प्रिंट के खुद की ड्रॉइंग के ब्लॉक तैयार कराए हैं। मैंने गोंड, वरली, मधुबनी आर्ट को कंटपरेरी लुक दिया है। इसे कल्चरल आर्ट फॉर्म से जोड़ा है। मैं वेजिटेबल डिजाइन, वन्य जीव और ऐतिहासिक धरोहर आदि को कपड़ों पर उकेर रही हूं। यूथ की पसंद को ध्यान रखते हुए नए-नए डिजाइंस बना रही हूं।
Updated on:
07 Aug 2021 01:05 am
Published on:
07 Aug 2021 01:04 am
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