बैतूल प्रशासन ने पहले पीपलबराज और बोर्ड पंचायत के अंतर्गत उमरडोह में रहने वाले आदिवासीयों को 19 दिसम्बर को गैरकानूनी कार्यवाही में हटाने की कोशिश की। उनके 45 घर तोड़े। फसल में जेसीबी चलाई गई, जहर डाला गया। आठ दिन भरने पर बैठने के बाद आदिवासीयों, बैतूल सांसद, विधायक और कलेक्टर के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें वन अधिकार कानून का पालन प्रमुख था, जिसके तहत वन अधिकार कानून, 2006 की धारा 4 (5) का सम्मान करते हुए लोगों को उनके कब्जे की जमीन से बेदखली पर रोक की बात थी, लेकिन वन विभाग ने 2 जनवरी, 2016 को फिर उमरडोह में वन भूमि पर कब्जेधारी आदिवासीयों के घर फिर तोड़े।