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गले में फंदा, हाथों में हथकड़ी पहनकर आदिवासियों का प्रदर्शन

ये किसान पिछले 15 साल से यहां हैं और उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर बंजर जमीन को फलदार बना दिया है। यहां आम, जाम, जामुन, आंवला, काजू आदि के पौधे लगाए हैं।

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Anwar Khan

Jan 06, 2016


बैतूल। फसल बर्बादी के कारण आत्महत्या कर रहे आदिवासियों किसानों के पक्ष में मंगलवार को बैतूल में अनोखे ढंग से प्रदर्शन हुआ। श्रमिक आदिवासी संगठन और समाजवादी जन परिषद के सदस्यों ने गले में फांसी का फंदा, हाथों में हथकड़ी और मुंह पर पट्टी बांधकर कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। आपको बता दें कि पिछले दो माह में फसल बर्बाद होने के चलते बैतूल क्षेत्र में 5 आदिवासी आत्महत्या कर चुके हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन इन आदिवासीयों की मदद करने की बजाए वनभूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके घर तोड़ रहा है। फसल और पीने की पानी में जहर डाल रहा है और उनके व्दारा फलदार पौधे उखाड़ रहा है। ये किसान पिछले 15 साल से यहां हैं और उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर बंजर जमीन को फलदार बना दिया है। यहां आम, जाम, जामुन, आंवला, काजू आदि के पौधे लगाए हैं।

इतना ही नहीं इन किसानों ने मेहनत से यहां स्टॉप डैम भी बनाया है, पर सरकार उन्हें इस जगह से हटाने में जुटी है। जबकि वन अधिकार कानून, 2006 के तहत जंगल पर उनके अधिकार तय होने तक उन्हें वनभूमि से हटाने पर रोक है। ऐसे में अब इन किसानों के पास आत्महत्या करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।


इतनी कार्रवाई अब तक हुई
बैतूल प्रशासन ने पहले पीपलबराज और बोर्ड पंचायत के अंतर्गत उमरडोह में रहने वाले आदिवासीयों को 19 दिसम्बर को गैरकानूनी कार्यवाही में हटाने की कोशिश की। उनके 45 घर तोड़े। फसल में जेसीबी चलाई गई, जहर डाला गया। आठ दिन भरने पर बैठने के बाद आदिवासीयों, बैतूल सांसद, विधायक और कलेक्टर के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें वन अधिकार कानून का पालन प्रमुख था, जिसके तहत वन अधिकार कानून, 2006 की धारा 4 (5) का सम्मान करते हुए लोगों को उनके कब्जे की जमीन से बेदखली पर रोक की बात थी, लेकिन वन विभाग ने 2 जनवरी, 2016 को फिर उमरडोह में वन भूमि पर कब्जेधारी आदिवासीयों के घर फिर तोड़े।