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बिंदास रहने का ये तरीका, कोई दिखा रहा फिल्म तो कोई पिला रहा जूस

विशेषज्ञों का मानना है कि कई छात्र इस दौरान तनाव के शिकार हो जाते हैं जिसके चलते वे पूरी तैयारी के बावजूद बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते।

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Juhi Mishra

Jan 01, 2016

high school exam centre

high school exam centre


प्रवीण श्रीवास्तव ञ्च भोपाल। फिल्म और फलों का रस छात्रों को परीक्षा के तनाव से बचाने का काम करेंगे। स्कूल इन दिनों अपने छात्रों को परीक्षा के तनाव से बचाने और उनके प्रदर्शन को निखारने पढ़ाई के साथ-साथ अनूठे प्रयोग भी कर रहे हैं। कोई स्कूल बच्चों को सत्र के दौरान फिल्म दिखा रहा है। कोई उनकी डाइट का ध्यान रख रहा है।

दरअसल माध्यमिक शिक्षा मंडल का परीक्षा कार्यक्रम जारी हो चुका है वहीं सीबीएसई भी जल्द ही अपना कार्यक्रम जारी कर देगी। छात्र भी अव्वल आने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। लेकिन कई बार पर्याप्त तैयारी के वावजूद छात्रों का परिणाम अपेक्षा अनुरूप नहीं आता। विशेषज्ञों का मानना है कि कई छात्र इस दौरान तनाव के शिकार हो जाते हैं जिसके चलते वे पूरी तैयारी के बावजूद बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। स्कूल प्रबंधन छात्रों को तनाव से मुक्त रखने के लिए नए नए तरीके अपना रहे हैं।

बच्चों को दिखाते हैं फिल्म
इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में बच्चों को तनाव से मुक्त रखने के लिए कई तरह के माइंड रिफ्रेशमेंट प्रोग्राम किए जाते हैं। स्कूल के प्राचार्य पीएस कालरा बताते हैं कि इन दिनों बच्चों को सबसे ज्यादा तनाव होता है। एेसे में हम स्कूल में उन्हें दोस्ताना माहौल देते हैं। बच्चों को फिल्म दिखाई जाती है। यह फिल्म एंटरटेंनमेंट के साथ-साथ मोटीवेशनल और एजुकेशल होती है। फिल्म देखने के दौरान छात्र तनाव को भूल जाते हैं और रिफ्रेश होकर परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।

स्कूल में ही देते हैं जूस और स्प्राउट
मिठी गोविंदराम स्कूल में एग्जाम सेशन में छात्रों की डाइट का विशेष खयाल रखा जाता है। इसके लिए बकायदा एक डाइटीशियन की सेवाएं ली जाती हैं जो बच्चों की डाइट पर नजर रखते हैं। स्कूल के प्राचार्य अजयकांत शर्मा बताते हैं कि बच्चों के लिए स्कूल में ही फ्रेश जूस कॉनर तैयार किया गया है। वहीं बच्चों को स्कूल में ही तैयार स्प्राउट (अंकुरित अनाज) दिए जाते हैं। जूस और अंकुरित अनाज स्वास्थ्य वर्धक होते हैं।

बच्चों के साथ माता-पिता की काउंसलिंग
शारदा विद्या मंदिर में बच्चों को तनाव से मुक्त करने के लिए सबसे बेहतर तरीका है काउंसलिंग। प्राचार्य शैफाली गौतम बताती हैं कि हम इसके लिए काउंसलर की मदद लेते हैं। वे बच्चों को बताते हैं कि परीक्षा के दौरान कैसे तनाव रहित रहें। परीक्षा की तैयारी कैसे करें, उत्तर कैसे लिखें। कितनी देर पढ़ाई करें और कैसे पढ़ाई करें। यही नहीं कई बार हम माता-पिता की काउंसलिंग भी करते हैं।

पहले ही कर लेते हैं तैयारी
कैम्पियन स्कूल के प्राचार्य फादर एथनास बताते हैं कि परीक्षा के मौसम में ही तैयारी करेंगे तो तनाव तो बढ़ेगा ही। इसके लिए हम सेमेस्टर दर सेमेस्टर तैयारी और टेस्ट लेते हैं। हर सेमेस्टर के बाद पहले के सभी सेमेस्टर का एग्जाम लिया जाता है। जैस तीसरे सेमेस्टर के बाद पहले के सभी सेमेस्टर का टेस्ट लिया जाता है। इससे छात्रो पर परीक्षा के दौरान अचानक बोझ नहीं पड़ता। इसके साथ ही ड्राइंग, पेंटिंग अन्य तरह की गतिविधियां भी आयोजित होती हैं ताकि बच्चों का मन लगा रहे।

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