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भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ा अपडेट, लोहे के सरिया लगाए बिना बना रहे सुरंग

Bhopal Metro- सुरंग निर्माण में अब लोहे की छड़ों की जगह ग्लास फाइबर रिइन्फोस्र्ड पॉलीमर यानि जीएफआरपी ले रहा

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Tunnels Being Constructed for Bhopal Metro Project Without Steel Reinforcement Bars

Tunnels Being Constructed for Bhopal Metro Project Without Steel Reinforcement Bars- Demo pic

Bhopal Metro- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ा अपडेट सामने आया है। मेट्रो की सुरंग में ग्लास फाइबर की छड़ें लगाई जा रहीं हैं। नई तकनीक से लोहे के सरिया का उपयोग काफी कम हो गया है। सुरंग निर्माण में अब लोहे की छड़ों की जगह ग्लास फाइबर रिइन्फोस्र्ड पॉलीमर यानि जीएफआरपी ले रहा है। भोपाल में मेट्रो ट्रेन की अंडरग्राउंड रेलवे लाइन में सुरंग की वॉल में भी इसका ही प्रयोग होगा। लोहे से 75 फीसदी हल्की इन छड़ों का विरोध भी हो रहा है। हाल में उज्जैन में एक ब्रिज निर्माण में इन छड़ों के उपयोग को लेकर शासन से शिकायत तक हुई है। हालांकि एक्सपर्ट इन्हें जंगरोधी और अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्टील विकल्प बन रहा है, लेकिन उच्च गुणवत्ता जरूरी है। इसके उपयोग के पहले निर्माण में लग रही सामग्री की गुणवत्ता की गहराई से जांच तय कराई जानी चाहिए।

ग्लास फाइबर रिइन्फोस्र्ड पॉलीमर यानि जीएफआरपी एक आधुनिक कंपोजिट मैटेरियल है। इसे कांच के बेहद महीन रेशों और एक खास तरह के प्लास्टिक रेजिन को मिलाकर बनाया जाता है। जीएफआरपी की अनेक विशेषताएं हैं। यह जंगरोधी है, लोहे या स्टील की तरह इसमें कभी जंग नहीं लगती। इतना ही नहीं, जीएफआरपी बेहद हल्का होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्टील की तुलना में लगभग 75 फीसदी हल्का होता है। जीएफआरपी खासा खिंचाव झेल सकता है। इसमें बिजली और गर्मी का प्रवाह नहीं होता।

इन्हीं खूबियों के कारण स्टील या लोहे के सरियों पर इसे तरजीह दी जा रही है। स्टील और लकड़ी के विकल्प के रूप में यह तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि अब कई अहम निर्माणों के टेंडर में इसकी शर्त भी रखी जा रही है।

हाईवे के टेंडर में इसकी शर्त रखी जा रही

इंजीनियर अब्दुल मजीद के अनुसार, पारंपरिक स्टील और लकड़ी के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ रहा है। नदियों या समुद्र के पास बनने वाले पुलों में, हाईवे के टेंडर में इसकी शर्त रखी जा रही है।

गुणवत्ता पर जोर

स्ट्रक्चरल इंजीनियर राजेश चौरसिया का कहना है कि यह स्टील विकल्प बन रहा है, लेकिन इसके उपयोग के पहले एक्सपर्ट से तय कराया जाए कि जो निर्माण में लग रहा है, उसकी गुणवत्ता बेहतर है। पूरा लाभ लेने और भवन- ब्रिज को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए अच्छी गुणवत्ता की ग्लास फाइबर रॉड ही उपयोग करें।