
one heart children
भोपाल। दो जिस्म और एक दिल। सागर में जन्मे ऐसे ही संयुक्त जुड़वां बच्चे चिकित्सा विज्ञान की पहेली बने हुए हैं। दुर्लभ शारीरिक संरचना के कारण दोनों को अलग किया जाना है। भोपाल एम्स में आए एक दिन के इन बच्चों को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि यह सामान्य मामला नहीं है। दो लाख में ऐसा कोई एक केस होता है।
दो जिस्म होने पर दो दिल का होना भी जरूरी है। इसलिए गुत्थी सुलझाने के लिए डॉक्टर मेडिकल साइंस की किताबें खंगाल रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है, अब तक कहीं एक भी सफल सर्जरी नहीं हुई है। हालांकि एम्स के डॉक्टरों ने हार नहीं मानी है। कॉर्डियोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशियन की टीम जांच कर रही है।
दुनिया में कहीं सफल सर्जरी नहीं, एम्स में जगी उम्मीद
आपस मे जुड़े बच्चों को मेडिकल साइंस में थोरेकोपेगस कहते हैं। अमूमन ऐसे मामलों में आधे बच्चे मृत पैदा होते है। एक तिहाई 24 घंटे के भीतर मर जाते हैं। कई बार ऐसे बच्चे लंबे समय तक जीवित रहते हैं। दोनों शरीरों का भार उठाने की स्थिति में बच्चे बिना सर्जरी के भी जीवित रह सकते हैं।
क्या है थोरेकोपेगस
- थोरेकोपेगस में संयुक्त जुड़वां बच्चों में से 40% छाती से जुड़े होते हैं। इनमें प्राय: एक ही दिल होता है।
- दो भ्रूण साथ विकसित होते हैं। 12 दिन बाद भ्रूण के अलग न होने पर ऐसे बच्चों का जन्म होता है।
- इलाज की योजना : डॉक्टर जांच कर रहे हैं। बड़े डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं। रिपोर्ट के बाद इलाज की योजना बनेगी।
Published on:
25 Jan 2024 10:51 am
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