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तिलक से होती है साधु-संतों की पहचान, 80 से भी ज्यादा हैं इनके प्रकार

यह तिलक हिंदू संस्कृति की पहचान माने जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, ये तिलक भी एक या दो प्रकार के नहीं होते हैं, बल्कि 80 से भी ज्यादा प्रकार के होते हैं।

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Alka Jaiswal

Apr 27, 2016

tilak

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भोपाल। उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ में तो आपने कई साधु-संतो को देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है इन साधु-संतो की पहचान उनके तिलक से होती है। भारतीय संस्कृति में तिलक लगाने की परंपरा आज से नहीं, बल्कि प्राचीन काल से चली आ रही है।

यह तिलक हिंदू संस्कृति की पहचान माने जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, ये तिलक भी एक या दो प्रकार के नहीं होते हैं, बल्कि 80 से भी ज्यादा प्रकार के होते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 64 तरह के तिलक वैष्णव साधुओं में लगाए जाते हैं। हिंदू धर्म में जितने भी संतों के मत हैं, पंथ है, संप्रदाय हैं, उन सबके भी अलग-अलग तिलक होते हैं।


शैव
इस तिलक में ललाट पर चंदन की तिरछी रेखा लगाई जाती है। इसके अलावा त्रिपुंड भी लगाया जाता है। ज्यादातर शैव साधु इसी तरह का तिलक लगाते हैं।

शाक्त
शक्ति की आराधना करने वाले साधु चंदन या कुंकुम का तिलक ना लगाकर सिंदूर का तिलक लगाते हैं। माना जाता है कि सिंदूर साधक की शक्ति को बढ़ाता है और उसकी उग्रता का प्रतीक भी होता है। जानकारों की मानें तो ज्यादातर आराधक तिलक लगाने के लिए कामाख्या देवी के सिद्ध सिंदूर का इस्तमाल करते हैं।


वैष्णव
तिलक लगाने के सबसे ज्यादा प्रकार आपको वैष्णवों में मिलेंगे। इनमें करीबन 64 प्रकार के तिलक लगाए जाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख तिलक निम्न हैं...

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1. लालश्री तिलक- इस तरह के तिलक में आसपास चंदन का तिलक लगाकर बीच में कुंकुम या हल्दी से रेखा बनाई जाती है।

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2. विष्णुस्वामी तिलक- इस तिलक को लगाने के लिए माथे पर भौहों के बीच दो चौड़ी रेखाएं बनाई जाती हैं।

3. रामानंद तिलक- इस तिलक को लगाने के लिए पहले विष्णुस्वामी तिलक लगाया जाता है, उसके बाद उसके बीच में कुंकुम से खड़ी रेखा बनाई जाती है।

Shaiv Tilak

4. श्यामश्री तिलक- कहा जाता है कि इस तिलक को भगवान कृष्ण के उपासक लगाया करते हैं। इस तिलक को लगाने के लिए पहले आसपास गोपीचंदन और बीच में काले रंग की मोटी रेखा लगाई जाती है।

5. अन्य तिलक- इनके अलावा कुछ और प्रमुख तिलक हैं जो कि साधु-संतों द्वारा लगाए जाते हैं। कई साधु-संत भस्म का भी तिलक लगाते हैं।

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