भोपाल। सत्र शुरू होने से पहले ही तय हो चुका था कि कितने दिनों में सिलेबस पूरा कराना है। कब परीक्षा लेनी है और कब परिणाम जारी करने हैं। इसके बावजूद हाल यह है कि कॉलेजों में कोर्स 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। जबकि शैक्षणिक कैलेंडर के मुताबिक पहले, तीसरे और पांचवंे सेमेस्टर की परीक्षाएं 17 नवंबर से 21 दिसंबर के बीच होनी हंै।
इसके चलते बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से जुड़े करीब डेढ़ लाख से अधिक छात्रों की चिंता बढ़ गई हैं। यदि कोर्स समय पर पूरा नहीं होता है तो इसका असर उनके रिजल्ट पर पड़ेगा और वे परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की मांग करते हैं तो डिग्री समय पर नहीं हो सकेगी।
सत्र 2015-16 के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार कोर्स पूरा करने और सतत समग्र मूल्यांकन के लिए कुल 93 कार्य दिवस हैं। 13 जुलाई से शुरू हुए सत्र के अब तक 70 दिन बीत चुके हैं। एमवीएम के छात्रों के अनुसार अभी तक कई विषयों का कोर्स 45 से 50 फीसदी ही हुआ है। एेसे में कॉलेज प्रबंधनों को बचे 23 दिन में कोर्स पूरा कराने की एक चुनौती होगी।
इधर, बरकतउल्ला विवि ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हालत में इस बार शैक्षणिक कैलेंडर को पिछडऩे नहीं देगा। क्योंकि हर बार यह बात सामने आती हैं कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के चलते शैक्षणिक कैलेंडर पिछड़ता है। प्रोफेसरों का कहना है कि पूरे समय परीक्षाएं आयोजित
होती रहती हैं।
142 दिनों का एक सेमेस्टर 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक 93 दिनों में पूरा करना है सिलेबस 49 दिन सतत मूल्यांकन प्रायोगिक परीक्षाएं, परीक्षा पूर्व तैयारी की छुट्टी, परिणाम और दस दिन के सेमेस्टर ब्रेक में निकल जाते हैं।
इनका कहना है-
यह सभी बातें हेड ऑफ दी इंस्टिट्यूशन की जिम्मेदारी होती है। इसे कैसे मैनेज करना है, यह प्राचार्य को तय करना चाहिए। समय पर कोर्स पूरा हो, इसके लिए एक्सट्रा क्लास लगाएं। परीक्षाएं कैलेंडर के अनुसार ही होंगी।
डॉ. एमडी तिवारी, कुलपति बीयू
एेसे छात्र जो रेगुलर कॉलेज जाते हैं, उनसे फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं। छात्र सिलेबस पूरा नहीं हो से परेशान हैं। तीसरे और पांचवे सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भराने लगे हैं।