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मानवाधिकार के समान नाम से चल रहे संघ, नहीं कस पा रहे नकेल जनता हो रही भ्रमित

डेढ़ साल पहले राज्य शासन ने आयोग को किया था आगाह, अब तक नहीं हो पाए एेसे संगठन चिह्नित  

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Ashok Gautam

भोपाल. भोपाल में 50 से अधिक एेसे संगठन सक्रिय है जो मानव अधिकार आयोग से मिलते-जुलते नामों का उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह प्रदेशभर में एेसे कई संस्थाएं-एनजीओ है जो आम जनता में भ्रम पैदा कर रहे हैं। अनुचित उपयोग किया जा रहा है। इस इस तरह के सभी संगठनों पर नकेल कसने के लिए राज्य शासन ने अक्टूबर, २०१७ में आयोग सहित सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और एसपी को कहा गया था, लेकिन अब तक इस तरह की संस्थाओं की पहचान तक नहीं हो पाई है।

एेसी संस्थाओं के काम करने के कारण भोपाल समेत प्रदेशभर की आम जनता में यह भ्रम पैदा होता है कि यह मानव अधिकार आयोग से संबंधित सरकारी संस्था होगी और लोग इनके झांसे मे आ जाते हैं। इस तरह के संगठन मानवाधिका आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिलते-जुलते नाम, लघुकृत नाम और उसके प्रतीकों के समान प्रतीक चिह्नों का भी उपयोग कर रहे हैं। जबकि इनका राष्टीय और राज्य के मानवाधिकार आयोगों से कोई वास्ता नहीं होता है। यह सिर्फ एनजीओ, संघ-संस्था के रुप में नाम का पंजीकरण करवा कर अपनी गतिविधियां शुरु कर देते हैं।

शासन ने जाहिर की दुरुपयोग की आशंका

राज्य शासन और मप्र मानवाधिकार आयोग ने तो यह तक पाया है कि एेसे नाम वाले संगठन-संघ, समाज में अनुचित उपयोग में भी सक्रिय है। लोगों को भ्रमित किया जाता है। एेसी संस्थाएं सिर्फ एेसे नामों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इन पर ठोस कार्रवाई की जाए।

मानव अधिकार से मिलते-जुलते सक्रिय संगठन

राजधानी सहित प्रदेशभर में मानवाधिकार आयोग के समान नाम वाले कई संगठन काम कर रहे है। यहां तक कि वाहनों पर भी प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष की नाम पट्टिका लगी नजर आती है। आयोग के समान नाम वाले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ, मानवाधिकार सुरक्षा संघ, मानव अधिकार संरक्षण संघ, मानवाधिकार सुरक्षा संरक्षण आर्गेनाइजेशन, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण आर्गेनाइजेशन, मानव अधिकार प्रोटेक्शन, ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, राष्ट्रीय मानवाधिकार, भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन, केंद्रीय मानवाधिकार संघ-संगठन-एसोसिएशन आदि कई नामों वाले संगठनों से लोगों में भ्रम पैदा होता है। इन संगठनों का राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग से कोई वास्ता नहीं है। यहां तक कि राज्य व केंद्र सरकारों से भी किसी तरह का वास्ता नहीं है।

इस तरह की संस्थाएं हमारी तरफ से अधिकृत नहीं है। कई बार इन संस्थाओं द्वारा मानव अधिकार के नाम का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है। हर कहीं पहुंचकर लोगों को गुमराह करते है। हमने शासन को भी इस बारे में अवगत करवाया है। जनता भी सतर्क रहे और एेसे संगठनों के खिलाफ आवाज उठाए। भ्रमित न हो। इस तरह से काम करने वालों के बारे में संबंधित जिलों की पुलिस को सूचित करें। शासन ने इन पर कार्रवाई के लिए लिखा भी है।

मनोहर ममतानी , सदस्य, मानव अधिकार आयोग।