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मुनि संघ ने मंत्रोच्चार के साथ 1008 बालकों को दिए उपनयन संस्कार

जवाहर चौक जैन मंदिर में प्रथमधारा महोत्सव का आयोजन।

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मुनि संघ ने मंत्रोच्चार के साथ 1008 बालकों को दिए उपनयन संस्कार

मुनि संघ ने मंत्रोच्चार के साथ 1008 बालकों को दिए उपनयन संस्कार

भोपाल। श्रद्धालुओं से खचाखच भरा जवाहर चौक जैन मंदिर परिसर, शरीर पर श्वेत वस्त्र, माथे पर मुकुट, गले में आभूषण के साथ बालकों का स्वरूप इंद्र जैसा नजर आ रहा था। आयोजन स्थल पर जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु उत्साहित थे। माता पिता अपने बेटे, दादा, दादी, नाना, नानी अपने पोते का संस्कार होते देख खुशी से उत्साहित हो रहे थे। मुनिसंघ द्वारा माथे पर स्वास्तिक लगाकर बालकों को संस्कारित किया जा रहा था।

मौका था जवाहर चौक स्थित जैन मंदिर में आयोजित प्रथमधारा महोत्सव कार्यक्रम का। मुनि प्रसाद सागर महाराज, मुनि शैल सागर, मुनि निकलंक सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस महोत्सव में 1008 बालकों ने भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया। शहर में पहली बार यह आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के अलावा देश के अनेक स्थानों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। पाठशाला के बच्चों द्वारा मंगलाचरण किया गया। सिद्ध भक्ति, सिद्ध प्रभु की आराधना के साथ सभी बालकों ने हाथों में कलश लेकर भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया गया।

मंत्रोच्चार के साथ उपनयन संस्कार
इस मौके पर उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया। शनिवार को चौक जैन धर्मशाला बालकों का मुंडन संस्कार हुआ था, रविवार को मुनिसंघ ने बालकों के मस्तक पर स्वास्तिक लगाकर मंत्रोचार के साथ संस्कारों से सुसज्जित किया और सभी बालकों को मंत्रोचार के साथ उपनयन संस्कार दिए। इस दौरान आयोजन स्थल भगवान जिनेन्द्र के जयकारों और णमोकार मंत्र के उच्चारण से गूंज रहा था। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न शहरों के बच्चे और श्रद्धालु शामिल हुए।

बच्चों को संस्कार अवश्य दे: मुनि प्रसाद सागर महाराज
इस मौके पर आयोजित प्रवचन में मुनि प्रसाद सागर महाराज ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों के लिए कुछ छोडकऱ जाओ या न जाओ संपत्ति के रूप में संस्कार अवश्य देकर जाना। जीवन में सबसे बड़ी संपत्ति संस्कार ही होते है। आज भी अन्य देश संस्कृति और संस्कारों के लिए भारत की ओर देखते हैं और यह भारतीय संस्कृति ने ही सिखाया है कि संस्कृति में किसी रूप में भी हिंसा न हो। भारत की संस्कृति में जो भी क्रियाएं होती हैं उनका किसी न किसी अर्थ मूल रहस्य छुपा होता है चाहे वह मुंडन संस्कार हो या तिलक लगाने की हो या कानों में कुंडल पहनने की हो। जैन मुनि ने कहा कि आज आपकी जैसी परिणति व्यवहार होगा वैसा ही आचरण संस्कार आपके बच्चों में आएंगे, क्योंकि आज के ये बच्चे कल के उज्जवल भारत का भविष्य हैं। जैसी जड़ मजबूत होगी तो तना भी मजबूत होगा और डालियां भी मजबूत होंगी। इस मौके पर मुनि शैल सागर महाराज के भी प्रवचन हुए। कार्यक्रम में प्रमोद जैन हिमांशु, राजेश जैन, प्रदीप नौहरकला, सुनील जैन, देवेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।