
Pradhan Mantri Awas Yojana
भोपाल. शहर में री- डेवलपमेंट योजना लागू करने का जिम्मा रहवासी संघों का होगा। प्रदेश की री- डेवलपमेंट पॉलिसी में इसे तय किया गया है। भोपाल में 1000 से अधिक बहुमंजिला भवनों के साथ 2000 से अधिक रहवासी कॉलोनियों में अलग-अलग नियमों से 4000 से अधिक सोसायटी बनी हुई हैं। नए विकास का जिम्मा इन्हीं सोसायटियों पर डाला गया है, लेकिन कौन सी सोसायटी ये काम करेगी, इसमें उलझन है। प्रदेश में आवासीय सोसायटी पंजीयन के लिए चार अलग-अलग अधिनियम है। हाल में नई मप्र रहवासी संघ नीति 2021 तय की है, लेकिन इसे विधिवत लागू नहीं किया, जिससे ये जमीन पर कहीं नजर नहीं आती। ऐसे में री- डेवलपमेंट पॉलिसी लागू होती है तो कॉलोनियों में इसके तहत विकास को लेकर विवाद की स्थिति बनने की आशंका है।
सोसायटी पंजीयन के लिए ये पांच अधिनियम
- मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960
- मप्र प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम 2000
- मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956
- मप्र नगर पालिक अधिनियम 1961
नोट- मप्र रहवासी संघ नीति 2021 के लागू होने पर विभिन्न अधिनियमों व नियमों में पंजीकृत मौजूदा आवासीय सोसायटी रहवासी संघ कहलाएगी।
ये है आशंका
भोपाल में इस समय अलग-अलग अधिनियम नियम के तहत पंजीकृत आवासीय सोसायटीज की संख्या 4000 है। कईं कॉलोनियों में तो मप्र सहकारी सोसायटी में पंजीकृत संस्था भी है तो नगर निगम से पंजीयन कराने वाली मोहल्ला समिति भी बनी है। ये लंबे समय से आपस में टकरा भी रही हैं। कोलार की मंदाकिनी कॉलोनी ही इसका बेहतर उदाहरण है। ऐसे में अब री डेवलपमेंट पॉलिसी के तहत कॉलोनियों में विकास कामों को शुरू किया जाए तो कौन सी सोसायटी संघ जिम्मेदार होगी, तय करना चुनौती रहेगी।
री-डेवलवमेंट में रेरा का भी हस्तक्षेप होगा
री डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में मप्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण नियम 2017 के तहत रेरा का हस्तक्षेप होगा। इसका पंजीयन कराना होगा और तय दस्तावेजों को जमा कराना होगा। नई पॉलिसी में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान किए हुए हैं। ऐसे में निगम व प्रशासन को मिलकर शहर में कॉलोनियों- मोहल्लों के लिए एक ही रहवासी संघ तय करने की कवायद करना होगी।
नगर निगम देगा प्रारूप, बनेगा रहवासी संघ
- जिन कॉलोनियों में रहवासी संघ कहीं पंजीबद्ध नहीं है वहां एक तय प्रारूप नगर निगम प्रदान करेगा। इसके तहत ही मप्र रहवासी संघ नीति 2021 के तहत संघ का पंजीयन होगा, लेकिन अभी इसे जमीन पर लाना होगा। इसका नोटिफिकेशन तय करने के बाद नगरीय निकायों को इसे लेकर प्रशिक्षण देना होगा, तभी ये बन पाएगा।
कोट्स
लोग खुद अपने क्षेत्र का विकास करें, इसे स्थानीय समितियां ही बेहतर तय कर पाएगी। इसके लिए काम किया जा रहा है। रहवासियों की मदद लेकर क्षेत्र का विकास किया जा रहा है।
- नीरज मंडलोई, पीएस, शहरी आवास एवं विकास
Published on:
06 Dec 2022 07:28 pm
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